भास्कर न्यूज | लोहरदगा अंजुमन इस्लामिया, लोहरदगा की अदलिया कमेटी ने 20 जुलाई (रविवार) को अंजुमन कार्यालय में आयोजित विशेष बैठक में सात सामाजिक एवं पारिवारिक मामलों की सुनवाई की। इनमें से चार मामलों का निष्पादन आपसी सहमति से शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। जिससे सामाजिक सुलह-संवाद की मिसाल पेश हुई। बैठक की अध्यक्षता अदलिया कमेटी के सदर अब्दुल रउफ अंसारी ने की, जबकि सेक्रेटरी शाहिद अहमद बेलू, सह-सचिव अनवर अंसारी, सदस्य इरशाद अहमद, ऑफिस सेक्रेटरी मौलवी अबुल कलाम तैगी एवं मोहम्मद असगर तैगी की भी उपस्थिति रही। मामलों में पहला सरवर खलीफा बनाम शबनम परवीन चांदनी (थानाटोली बनाम हिन्दपीढ़ी, रांची)- वर्षों से चल रहा पति-पत्नी विवाद आपसी सहमति से समाप्त कराया गया। दूसरा रशिदा खातून बनाम अफरोज कुरैशी (टाकू, कुड़ू बनाम तैगी नगर, लोहरदगा)- पारिवारिक लेन-देन संबंधी विवाद सुलझाया गया। तीसरा राबिया खातून बनाम मोक्ता सतबरवा, (पलामू)- विवाद की सुनवाई के बाद अगली तारीख निर्धारित की गई। चौथा हाफिज शनाउल्लाह बनाम गुलबशा परवीन (आनंदपुर किस्को बनाम छत्तरपुरटोली किस्को)- पति-पत्नी विवाद में 27 जुलाई को फाइनल सुनवाई की तिथि तय की गई। पांचवा साबिर अंसारी बनाम शमीना खातून (बालूमाथ जलान, लातेहार बनाम डांडू अम्बाटोली, सेन्हा)- अंतिम निर्णय से पूर्व बालूमाथ की अंजुमन से संपर्क का निर्णय। छठा अख्तर अंसारी बनाम पुत्र सैफ अंसारी जुरिया, (लोहरदगा)- जमीन बंटवारा विवाद की सुनवाई के बाद अगली तारीख दी गई। सातवां दरख्शां वारिस बनाम सरफराज अहमद (पलामू बनाम थाना रोड, लोहरदगा)- पति-पत्नी विवाद की सुनवाई की गई। इन मामलों के अतिरिक्त अन्य प्रकरणों पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिनकी जांच के उपरांत शीघ्र निष्पादन का आश्वासन दिया गया। मौके पर सदर अब्दुल रउफ अंसारी ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा, “आपसी विवादों को थाना या कोर्ट-कचहरी में ले जाने से पहले अदलिया कमिटी की मध्यस्थता से समाधान की कोशिश होनी चाहिए। हमारा उद्देश्य है कि हर मामला न्याय के साथ-साथ रिश्तों की मरम्मत करते हुए सुलझाया जाए। सेक्रेटरी शाहिद अहमद बेलू ने कहा अदलिया के फैसले किसी पक्ष की हार-जीत नहीं होते, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से होते हैं। यह प्रक्रिया संबंधों में कटुता के बजाय समझ और सौहार्द बढ़ाती है। अंजुमन इस्लामिया की अदलिया कमिटी सामाजिक न्याय, आपसी संवाद और सहमति से समाधान की दिशा में एक आदर्श मॉडल बन चुकी है। ऐसे प्रयासों से समाज में न सिर्फ विवादों का समाधान सहज होता है, बल्कि न्याय भी अधिक मानवीय और सामूहिक हो जाता है।


