इस अवसर पर डिप्टी मास मीडिया अफसर रजिंदर सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग लुधियाना की ओर से जिलेभर में एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों, पर्चों के वितरण और आशा वर्करों की मदद से घर-घर जाकर लोगों को साफ पानी पीने, भोजन को ढककर रखने, हाथ धोने की आदत डालने और बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने जैसी जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी दी जा रही है। रजिंदर सिंह ने कहा कि जब तक लोग खुद सतर्क नहीं होंगे, तब तक किसी भी बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जितना अधिक लोग जागरूक होंगे, उतनी ही जल्दी बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और अगर हम समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाएं, तो खुद को और अपने परिवार को इस मौसम में भी स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सकता है। भास्कर न्यूज|लुधियाना सावन का मौसम जहां एक ओर हरियाली और ठंडक का सुख लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह मौसम जलजनित बीमारियों की आशंका को भी बढ़ा देता है। बारिश के दौरान गंदगी, जलभराव और दूषित पानी के कारण डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पीलिया और गैस्ट्रोएंट्राइटिस जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लुधियाना ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। सहायक सिविल सर्जन डॉ. विवेक कटारिया ने कहा कि इस मौसम में पीने के पानी की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जहां-जहां पाइपों में लीकेज है या पानी खुले में जमा होता है, वहां दूषित पानी के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। उन्होंने सलाह दी कि लोग केवल उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं, खाने को ढककर रखें और बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालें। डॉ. कटारिया ने बताया कि लुधियाना जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों में ओआरएस, आईवी फ्लूइड्स, एंटीबायोटिक्स सहित जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध करा दिया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की सभी टीमें अलर्ट मोड पर हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज शुरू किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग इन बीमारियों से जल्दी प्रभावित होते हैं, इसलिए इनकी विशेष देखभाल होनी चाहिए। बुखार, उल्टी, दस्त या कमजोरी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच करवाएं।


