अश्विनी/आरिफ|गुमला आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा है। 26 साल पहले यानि 26 जुलाई 1999 को हमारी सेना ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को पराजित किया था। इसमें गुमला के तीन लाल ने भी ऑपरेशन “विजय” में अपने लहू से वीरता की अमिट कहानी लिखी है। इनमें शहीद जॉन अगस्तुस एक्का, शहीद हवलदार बिरसा उरांव और शहीद विश्राम मुंडा शामिल है। इन तीन वीर सपूतों को आज भी बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। विजय दिवस पर इन्हें जगह जगह कार्यक्रम आयोजित कर नमन किया जाता है। शहीद बिरसा उरांव सिसई प्रखंड के बरी जतराटोली गांव के रहने वाले थे। दो सितंबर 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। पत्नी मीला उरांव ने कहा कि पति के बलिदान पर गर्व होता है। पिता से प्रेरित होकर ही बेटी पूजा विभूति उरांव पुलिस में गई है। आज वह दारोगा के पद पर है। वर्तमान में रांची में पोस्टेड है। बेटा चंदन उरांव नौकरी की तलाश में है। पत्नी को पेंशन मिलती है, लेकिन सरकार की ओर से न ही घर मिला और न ही अनुकंपा पर नौकरी। हालांकि सिसई के नए ब्लॉक परिसर में उनकी प्रतिमा लगाई गई है। रांची में सैनिक कॉलोनी में किराए के मकान में रहता है शहीद विश्राम का परिवार : शहीद विश्राम मुंडा का नाम भी गुमनाम हो चुका है। शहीद का परिवार मदद की उम्मीद छोड़ अब पैतृक गांव भरनो नवाटोली से निकल कर रांची बूटी मोड़ स्थित सैनिक कॉलोनी में किराए पर रहने को विवश हैं। शहीद के तीन बेटियां व एक बेटा है। बड़ी बेटी मुन्नी बरला एक एनजीओ से जुड़ कर कार्य कर रही हैं। छोटी बेटी किरण बरला बीटेक कर घर पर है। दोनों का विवाह हो चुका है। वहीं सबसे छोटी बेटी अंजली बरला बीए कर एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रही है। वहीं बेटा विक्रम मुंडा घर पर है। पत्नी रीना देवी ने बताया कि पति के शहीद होने का उन्हें गर्व है, लेकिन सरकार से मदद नहीं मिलने की टीस है। हालांकि पति के शहादत के बाद सबकुछ देने का कोरा आश्वासन दिया गया था। सरकार से मदद नहीं मिली जॉन अगस्तुस के परिजनों को शहीद जॉन अगस्तुस रायडीह के तेलया गांव के रहने वाले थे। जम्मू कश्मीर की लाइन ऑफ कंट्रोल में ऑपरेशन विजय के तहत 1999 में पाकिस्तान से भीषण युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते 25 दिसंबर 1999 को वीरगति प्राप्त हुए थे। लेकिन आज तक किसी ने भी इनके परिवार का कोई सुध नहीं ली। परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं मिली। गांव का भी विकास नहीं हुआ है। शहीद जॉन अगस्तुस बिहार सात रेजीमेंट में हवलदार के पद पर तैनात थे।


