बार नवापारा के जंगलों में 24 हाथियों के झुंड ने स्थायी बसेरा बना लिया है। काले हिरणों को वन विभाग ने बसा दिया। अब अगला टारगेट बाघ है। मप्र और महाराष्ट्र से दो जोड़ी बाघ लाकर यहां बसाने का प्लान है। बार में पहले ही 10 हजार से ज्यादा हिरण-चीतल और ढाई हजार बायसन सहित दर्जनों की संख्या में अन्य वन्य प्राणी हैं। लगातार बढ़ रही वन्य प्राणियों की संख्या को देखते हुए अब बार के घने जंगलों में बसे 5 गांवों को बाहर किया जाएगा। इसके लिए पांचों गांव में सर्वे शुरू कर दिया गया है। पांचों गांव में हर घर दस्तक दी जा रही है। ग्रामीणों से पूछा जा रहा है कि वे जंगल के बाहर किस शर्त पर जाना चाहते हैं? ग्रामीणों के लिए कैश या मकान-जमीन का विकल्प रखा गया है। ग्रामीण जिस विकल्प पर राजी होंगे, उसी हिसाब से उनका मुआवजा तय किया जाएगा। 10 साल पहले 2012-13 में बार नवापारा के कोर एरिया में बसे 3 गांव को जंगल के बाहर शिफ्ट किया जा चुका है। बार के जंगलों के प्रारंभिक सर्वे के बाद 18 गांव को घने जंगलों में वन्य प्राणियों के मूवमेंट वाले कोर एरिया में है। सुबह शाम इन गांव के आस-पास जंगली जानवरों का मूवमेंट रहता है। इसलिए फिलहाल इन पांच गांवों को पहले जंगल से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। इन गांवों में बार, हद्दी, चरोदा, गनोद और अकलतरा गांव हैं। गौरतलब है कि 18 में 3 गांव लाटादादर, नवागांव और रामपुर को 10 साल पहले गांव के बाहर शिफ्ट किया जा चुका है। ये गांव बार नवापारा की सरहद के बाहर जरूर हैं लेकिन ज्यादा दूर नहीं हैं। ग्रामीणों को बार से 10-11 किमी दूर ही बसाया गया है। 15 लाख कैश या मकान-खेत जो विकल्प चुनेंगे वही मिलेगा ग्रामीणों के लिए 15 लाख कैश या मकान व 5 एकड़ खेत का विकल्प रखा गया है। इनमें से ग्रामीण जो विकल्प चुनेंगे, उन्हें पूरा किया जाएगा। सर्वे के दौरान ग्रामीणों से ये भी पूछा जा रहा है कि वे जंगल के बाहर जाने के लिए 15 लाख कैश लेंगे या खेत-मकान। ग्रामीण अगर मकान व खेत का विकल्प चुनेंगे तो उन्हें 5 एकड़ खेत डेवलप करके दिया जाएगा। इसके अलावा पक्का मकान सारी सुविधाओं के साथ तथा गांव के करीब ही स्कूल भवन व डिस्पेंसरी भी बनाकर दी जाएगी। दस साल पहले शिफ्ट किए गए तीनों गांव के ग्रामीणों ने खेत व मकान का विकल्प चुना था। कहीं विरोध नहीं, जल्द भेजेंगे रिपोर्ट एक गांव के सर्वे में 15 से 20 दिन लगेंगे। हमारा प्रयास है कि तीन माह के भीतर मुख्यालय रिपोर्ट भेज दी जाए। इसी योजना के अनुसार फील्ड में टीम उतारी गई है। हमारे प्रारंभिक सर्वे के अनुसार किसी भी गांव के लोग शिफ्टिंग के विरोध में नहीं है। सर्वे में देरी नहीं होगी। धमशील गनवीर, डीएफओ बलौदाबाजार


