ननों की गिरफ्तारी न्याय नहीं, आरएसएस का भीड़तंत्रः राहुल दुर्ग में धर्मांतरण, मानव तस्करी मामले मैं दो नन की गिरफ्तारी पर सियासत गरमा गई है। गिरफ्तारी के खिलाफ कांग्रेस और यूडीएफ सांसदों ने दिल्ली में संसद परिसर में प्रदर्शन किया। लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा “छत्तीसगढ़ में 2 कैथोलिक ननों को उनको आस्था के कारण निशाना बनाकर जेल भेज दिया गया। यह न्याय नहीं, बल्कि भाजपा आरएसएस का भीड़तंत्र है। यह एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाता है। अल्पसंख्यकों को बदनाम किया जा रहाः प्रियंका गांधी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने स्टेशल मीडिया पर लिखा- मैं 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई घटना की निंदा करती हूं। दो ईसाई गनों को बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में लिया गया। उन पर धर्मांतरण और मानव तस्करी के झूठे आरोप लगाए गए हैं। महिला सुरक्षा सर्वोपरि, कानून निष्पक्ष कार्रवाई करेगाः साय ननों को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जार दिया। सीएम ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इससमें ह्यूमन ट्रैफिकिंग और मांतरण की आशंका व्यक्त की जा रही है, जो महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय है। मामले की जांच जारी है और यह न्यायालयीन प्रक्रिया में है। सरकार पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है, तथा कानून अपनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेगा। हमारी बस्तर की बेटियों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रूप देना दुर्भाग्यजनक है। भाजपा बोली- राहुल बौखलाए, आरोपियों के साथ खड़े कांग्रेस के आरोपों को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा भी आक्रामक हो गई है। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है कि राहुल गांधी एक बार फिर कट्टरपंथी तयों के बचाव में खड़े हैं। बेटियों की मानव तस्करी कर रही दो आरोपियों की गिरफ्तारी पर वह जिस तरह से बौखलाए हैं, वह सवाल खड़ा करता है। राहुलनी, बिना जाने वेटिकन सिटी के रिश्तेदारों को बचाने के लिए ट्वीट करने के पूर्व उनके कांड भी जान लीजिए। ये है मामलाः ननों पर धर्मांतरण और मानव तस्करी का केस नारायणपुर की तीन युवतियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर नन सुखमन मंडावी और नन प्रीती मैरी और वंदना फ्रांसिस ले जा रही थीं। दुर्ग रेलवे पुलिस ने युवक और दोनों नन को 25 जुलाई की गिरफ्तार कर लिया। उन पर मानव तस्करी और धर्मांतरण का प्रकरण दर्ज किया गया। भास्कर इनसाइट पुलिस जांच में मिले तथ्य-नर्सिंग में दाखिला नहीं, फिर भी ट्रेनिंग और नौकरी का वादा पुलिस जांच में सामने आया कि लड़कियों को पहले नर्सिंग प्रशिक्षण का वादा किया गया था, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि उनका नर्सिंग में एडमिशन ही नहीं हुआ था। फिर भी उन्हें लालच दिया गया था कि ट्रेनिंग और धर्मातरण के बाद नौकरी मिलेगी। इस तरह बहावकर नन इन्हें आगरा ले जा रही थीं। तीनों लड़कियों और पीड़ित लड़कियों के माता-पिता रक्षकों के प्रारंभिक बयानों से यह बात सामने आई है। साथ ही मुखराम और दोनों ननों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उनके बयान तथ्यों और परिस्थितियों के विपरीत हैं। इसके अलावा अब तक की जांच में लड़कियों द्वारा नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए आवेदन करने का कोई सुराग नहीं मिला है। बता दें कि पुलिस ने प्रथम दृष्टया जांच में तीनों आरोपियों को दोषी पाया है। आरोपी स्थानीय पंचायत और लड़कियों के परिजनों को सूचना देने से संबंधित कोई डॉक्यूमेंट नहीं दे पाए। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।


