स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) अपने स्टील प्लांटों की क्षमता बढ़ाएगी। इसके इस वर्ष 7500 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। यह पिछले वित्त वर्ष (2024-25) की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। बताया कि बोकारो स्टील प्लांट सहित राउरकेला, भिलाई, दुर्गापुर आदि प्लांटों में खर्च किए जाएंगे। कपंनी का उत्पादन बढ़ेगा, तो लाभ भी ज्यादा होगा। इससे कार्मिकों को भी कई तरह के लाभ मिलेंगे। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी सेल विस्तारीकरण के दौर से गुजर रही है। लगभग एक लाख करोड़ रुपए के व्यय से ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में फैले अपने पांच एकीकृत संयंत्रों (आईएसपी) की संयुक्त दो करोड़ टन क्षमता को बढ़ाकर 2030 तक 3.50 करोड़ टन करने के लिए काम कर रही है। 2030 तक बीएसएल को 7.55 एमटी बनाने का लक्ष्य गौरतलब है कि बोकारो स्टील प्लांट की क्षमता 5 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 7.55 एमटीपीए करने की योजना है। इसके लिए 20000 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इस प्रस्तावित विस्तार योजना से 2500 से ज्यादा प्रत्यक्ष और 10000 से ज्यादा लोगों के अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इतने वृहद स्तर की पूंजी और तकनीकी प्रगति के निवेश से न केवल बोकारो इस्पात संयंत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।


