भास्कर न्यूज| महासमुंद जमीन की सीमांकन और नक्शा दुरुस्त किए जाने को लेकर चार साल से भटक रहे एक युवक ने कलेक्टर को अपना आवेदन सौंपा। उसने कहा है कि राजस्व विभाग की लापरवाही और टालमटोल के कारण उसका भूमि संबंधी प्रकरण अधर में लटका हुआ है। साथ ही उनका भविष्य, पढ़ाई और आजीविका भी प्रभावित हो रही है। अविनाश ने आवेदन में बताया गया है कि 2021-22 में जब मधुस्मिता पति ज्योतिष ने उसकी भूमि पर अवैध घेराबंदी की, तब उसने तहसीलदार बसना को अतिक्रमण हटाने के लिए आवेदन दिया। तब तत्कालीन तहसीलदार के आदेश पर पटवारी मौके पर पहुंचे, पंचनामा तैयार हुआ। लेकिन कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। 2025 में बार-बार आवेदन देने के बाद 15 जुलाई को सीमांकन का कार्य पूर्ण कर मौके पर पंचनामा भी बनाया गया। बावजूद 19 जुलाई तक न सीमांकन रिपोर्ट जमा हुई है और न ही नक्शा दुरुस्ती पूरी हुई है। अविनाश का कहना है कि सालों.. से इन्हीं नक्शों पर अन्य लोगों का काम होता आया है और उनके पास 1985 से 86 का प्रमाणित, हस्ताक्षरित नक्शा की सत्य प्रतिलिपि भी उपलब्ध है, फिर भी उनकी फाइल को रोका जाना स्पष्ट अन्याय है। आरोप है कि जिन लोगों ने उनकी भूमि पर अवैध कब्जा किया मधुस्मिता पति ज्योतिष, फकीर कुमार देवता पिता गुणसागर और पार्वती पति शरदचंद्र उनके नाम पर तो ऑनलाइन नक्शा दुरुस्ती कर दी गई। युवक ने सीमांकन टीम, दो राजस्व निरीक्षक और पांच पटवारियों के जो सीमांकन कार्य पूर्ण किया गया है, उसकी अंतिम रिपोर्ट और नक्शा जारी करने की मांग है। इस पर राजस्व निरीक्षक बसना राकेश साहू, का कहना है कि बसना उपलब्ध पुराने नक्शों पर आरआइ, पटवारी, स्क्रीनिंग अधिकारी और भूअभिलेख अधीक्षक के हस्ताक्षर नहीं हैं।


