नीले कार्ड होल्डरों को ऑनलाइन नाम दर्ज होने के बावजूद नहीं मिल रहा गेहूं

अमनदीप सिंह | अमृतसर नीले कार्ड होल्डरों के नाम ऑनलाइन दर्ज होने के बावजूद उन्हें गेहूं नहीं मिल रही है। डिपो होल्डर की ओर से लाभार्थियों को कहा जा रहा है कि उनके नीले कार्ड ई-श्रम वाले बने हैं। पिछली 2 बार की एलोकेशन लाभार्थियों को नहीं मिली है। डिपो होल्डर द्वारा फिर कहा गया है कि उक्त कार्डों की एलोकेशन जनवरी में आएगी। दूसरी तरफ एएफएसओ का कहना है कि ई-श्रम कार्ड होल्डरों की एलोकेशन कब आएगी, कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं, देखा जाए तो नीले कार्ड होल्डरों को उनका बनता हक नहीं मिल रहा है। ई-श्रम वाले लाभार्थियों को इस बार भी गेहूं से वंचित रखा गया है। जिस कारण नीले कार्ड होल्डरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कार्ड होल्डरों का कहना है कि सरकार की ओर से कार्ड बनाने का क्या फायदा लाभ मिलना ही नहीं है। दूसरी तरफ कुछ कार्ड होल्डरों को पूरे परिवार जन की गेहूं नहीं मिल रही है। डिपो होल्डर शरणजीत कौर के पति ने बताया कि कुछ परिवारों के नाम ऑनलाइन चढ़े हुए हैं, वह कार्ड ई-श्रम वाले हैं। उनकी गेहूं अभी नहीं आई है। सरकार ने जो नए ई-श्रम कार्ड नए बनाए हैं उन्हीं कार्ड होल्डरों को परेशानी आ रही है। नए कार्ड होल्डरों की एलोकेशन जनवरी में डिपो होल्डर को डाली जानी है। तब उन परिवारों की गेहूं दी जाएगी। मामला एएफएसओ के ध्यान में भी लाया गया है। किसी परिवार के 4 मेंबर है तो 4 लोगों को ही गेहूं दी जाएगी। सरबजीत कौर निवासी जवाहर नगर ने बताया कि पहले उनका कार्ड काट दिए गया, जिसे बाद में फिर बनाया गया। इस बार उनका नाम कंप्यूटर पर ऑनलाइन दर्ज होने के बावजूद डिपो होल्डर द्वारा उन्हें गेहूं नहीं दी जा रही। उन्हें इस बार भी गेहूं नहीं मिली और पिछली बार भी नहीं मिली थी। हर बार डिपो होल्डर कहता है कि आपकी गेहूं नहीं आई है, आपको अगली बार 3 महीने के बाद दी जाएगी। कार्ड बने हुए ढाई साल हो गए इसमें सिर्फ 2 बार ही गेहूं मिली है। कभी कह देते हैं कि कार्ड कट गया है कभी कह देते हैं कि आपकी गेहूं नहीं आई है। उन्हें परेशान करके रखा है। सतिंदर कौर निवासी जवाहर नगर ने बताया कि जब से नीला कार्ड बना है। तब से बड़े बेटे की गेहूं नहीं मिली है। उनके परिवार में 4 लोग है पति-पत्नी और 2 बेटे। अब तो छोड़े की गेहूं मिलनी भी बंद हो गई है। आज तक सिर्फ उन्हें 2 लोगों को ही गेहूं दी जाती है। डिपो होल्डर कहता है कि उनके बेटों की गेहूं नहीं आई है।

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