जबलपुर में कलेक्टर ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए अभिभावकों से वसूली गई अधिक फीस वापस दिलवाई है। अब भोपाल के अभिभावक भी अधिक फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई करने और अभिभावकों को अतिरिक्त फीस वापस दिलवाने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर पालक महासंघ के बैनरतले अभिभावक 29 दिसंबर को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर धरना देंगे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल विश्वकर्मा और भोपाल जिला अध्यक्ष अतुल शर्मा ने बताया कि निजी स्कूलों की पूरे प्रदेश में मनमानी है। भोपाल में भी स्कूलों ने सुविधाओं से ज्यादा फीस वसूल की है। कई स्कूलों में बच्चों ने कम्प्यूटर लैब तक नहीं देखा और स्कूल कम्प्यूटर एजूकेशन के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे जबलपुर कलेक्टर ने सख्ती दिखाई और साल 2018 से 2024 के बीच स्कूलों द्वारा वसूली गई अतिरिक्त फीस अभिभावकों को वापस दिलवाई है, वैसा ही भोपाल और अन्य जिलों में क्यों नहीं हो सकता है। विश्वकर्मा कहते हैं कि स्कूल फीस हर घर से जुड़ा मामला है और जबलपुर कलेक्टर ने इस दिशा में अच्छा काम कर उदाहरण पेश किया है। फिर दूसरे कलेक्टर ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं? उन्होंने बताया कि भोपाल में हालात बहुत बद्तर हैं। यहां स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों से संपरीक्षित लेखे एजुकेशन पार्टल के माध्यम से मांगे गए थे। 15000 स्कूलों ने जानकारी ही नहीं दी। फिर भी विभाग कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। जिला प्रशासन ने बस्ते के वजन की जानकारी मांगी थी, जो स्कूलों ने नहीं दी। वे कहते हैं कि स्कूल शिक्षा मंत्री ने फीस रेग्यूलेशन एक्ट में संशोधन करवा कर नई विभागीय समिति का गठन कर दिया है। जिसके अध्यक्ष खुद स्कूल शिक्षा मंत्री होंगे। ऐसा करके कलेक्टर के अधिकार छीन लिए गए हैं। ऐसे में अभिभावकों को कैसे न्याय मिलेगा। वे आरोप लगाते हैं कि विभाग निजी स्कूलों को संरक्षण दे रहा है। उन्होंने कहा कि हम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मांग कर रहे हैं कि अभिभावकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित किया जाए और एक्ट में संशोधन वापस लिया जाए।


