हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा था, उन्होंने रिम्स में सुधार के लिए कई बार प्रयास किए। कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन कोई भी काम कराने या सुविधा उपलब्ध कराने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है। सारे अधिकार कैबिनेट के पास हैं। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही काम होता है। इस पर अदालत ने कहा- हो सकता है कि बड़े मामलों में कैबिनेट के पास प्रस्ताव भेजा जाता होगा, लेकिन रखरखाव का काम तो निदेशक कर ही सकते हैं। इस पर भी निदेशक ने कहा कि सारे अधिकार कैबिनेट के पास हैं। इसके बाद अदालत ने निदेशक को शपथपत्र के माध्यम से यह बताने को कहा कि रिम्स की किस नियमावली में अस्पताल में सुधार और रखरखाव व सुविधाएं उपलब्ध कराने का अधिकार निदेशक के पास नहीं है। इधर, दैनिक भास्कर ने निदेशक के बयान के बाद रिम्स के दो पूर्व निदेशकों से बात की। रिम्स एक्ट, रिम्स रूल्स व रिम्स रेगुलेशन को बारीकी से समझने का प्रयास किया। जैसा दोनों पूर्व निदेशकों ने बताया कि रिम्स में ए ग्रेड (फैकल्टी) को छोड़कर बी ग्रुप नियुक्ति में उनके पास अनुशंसा करने का पूर्ण अधिकार है। ग्रुप सी व डी यानी थर्ड व फोर्थ ग्रेड की स्थाई नियुक्ति निदेशक खुद अपने स्तर से कर सकते हैं। निदेशक, शासी परिषद के सचिव व कार्यकारिणी समिति के सभापति के रूप में कार्य करेगा। संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की हैसियत से निदेशक संस्थान के दक्षतापूर्ण संचालन तथा इसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी होगा। निदेशक ऐसी शक्तियों का उपयोग एवं कार्यों का निष्पादन करेगा, जो नियमों- विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किए गए हों। रिम्स एक्ट के अनुसार, ये हैं निदेशक की शक्तियां… 144 स्टाफ नर्स की फाइल जेएसएससी ने लौटा दी, रिम्स में 400 से ज्यादा पद खाली डेढ़ साल में एक भी स्थाई नियुक्ति नहीं हुई, थर्ड व फोर्थ ग्रेड के 586 पद खाली 2. खरीद : पूर्व निदेशकों के अनुसार, रिम्स रूल्स व रेगुलेशंस में वित्तीय शक्ति का उल्लेख ठीक से नहीं था। इसके बाद शासी परिषद की बैठक में यह तय हुआ था कि एक करोड़ तक की खरीद निदेशक स्वयं कर सकते हैं। इसे ऊपर शासी परिषद मंजूरी देगा। स्थिति : रिम्स में अब भी थर्ड व फोर्थ ग्रेड के अधिकांश पद आउटसोर्स पर हैं। जबकि रिम्स अस्थाई रूप से भी सभी की नियुक्ति कर सकता है। अभी भी रिम्स में मरीजों की संख्या की तुलना में 500 से ज्यादा अस्थाई कर्मियों की कमी है। स्थिति : रिम्स के भवन की हालत जर्जर है और कई उपकरण खराब पड़े हैं। न्यूरोसर्जरी में जरूरी सी-आर्म मशीन महीने में 10 दिन खराब पड़ी रहती है। बिल्डिंग की बात करें तो दीवारों में पानी सीपेज से काई जम गई है, वार्ड की फर्श की टाइल्स टूटी हुई हैं। स्थिति : रिम्स में सालों से दवा का स्टॉक मेनटेन नहीं है। अब भी मरीज निजी दुकान से दवा खरीदने को विवश हैं। सर्जिकल आइटम भी रेगुलर सप्लाई में नहीं रहता है। सेंट्रल इमरजेंसी तक के मॉनिटर मात्र हजार रुपए के कंज्यूमेबल्स के कारण बंद हैं। स्थिति : बी ग्रेड में नर्सों की बात करें तो रिम्स में 144 नर्सों की नियुक्ति के लिए फाइल जेएसएससी को भेजी गई थी, लेकिन वहां से फाइल वापस लौटा दी गई है। अभी 400 से ज्यादा नर्सों के पद रिक्त हैं। वहीं थर्ड व फोर्थ ग्रेड के 914 सृजित पदों में केवल 328 कार्यरत हैं। 4. अस्थाई नियुक्ति : रिम्स रेगुलेशन 2014 के अनुसार, निदेशक को अस्थाई नियुक्ति का भी अधिकार है। रेगुलेशन में जिक्र है कि निदेशक नियमों के अनुरूप नियुक्ति कर सकते हैं। 3. मरम्मत व रख-रखाव : निदेशक के पास संस्थान की बिल्डिंग से लेकर उपकरणों तक की मरम्मत व रखरखाव की पूरी शक्ति है। इनकी मरम्मत भी निदेशक अपनी शक्ति से करा सकते हैं। 1. नियुक्ति : फैकल्टी की नियुक्ति करने का अधिकार निदेशक के पास नहीं हैं। बी ग्रुप की नियुक्ति में निदेशक की अनुशंसा के बाद शासी परिषद कर सकती है। जबकि थर्ड व फोर्थ ग्रेड की सभी नियुक्ति के लिए निदेशक के पास पूर्ण शक्ति है। जानें निदेशक की शक्ति और रिम्स की वर्तमान स्थिति… हाईकोर्ट में निदेशक ने बताया उनके पास काम कराने या सुविधाएं देने या बढ़ाने की कोई शक्ति नहीं, सारे अधिकार कैबिनेट के पास…


