भास्कर न्यूज|गुमला जिले में सरकार ने सितंबर 2024 में मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की थी। गुमला के 12 प्रखंडों के लिए दस मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हो रही थी। जो पिछले तीन महीने से फंड के अभाव में बंद पड़ी हैं। इसके लिए स्वास्थ्य महकमे की एजेंसी के साथ एमओयू हुआ था। जिसके बाद आदिवासी बहुल गुमला जिले के ग्रामीण इलाकों के मरीजों को यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल रहा था। किंतु फिलहाल यूनिट बंद होने से मरीजों में मायूसी है और उन्हें परेशानी हो रही है। यूनिट बंद होने का कारण संस्था के पास फंड का अभाव बताया जा रहा है। घर तक पहुंचकर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना फिलहाल ठप हो गई है। इस योजना से वैसे मरीजों का इलाज किया जा रहा था, जो अस्पताल भी नहीं पहुंच पाते हैं। अब ऐसे मरीजों को 250-500 रुपए खर्च कर निजी क्लीनिक या सदर अस्पताल आना पड़ रहा है। हालांकि हंस फाउंडेशन के प्रबंधक तौसिफ आलम ने कहा कि फंड आने के बाद फिर से मोबाइल मेडिकल यूनिट चालू कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही यह व्यवस्था पुन: बहाल की जाएगी। मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को हो रही है। चूंकि दूर दराज के मरीजों को मुफ्त में इलाज और जांच के लिए लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंचने में मोटा भाड़ा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण बुजुर्ग इलाज कराने के लिए लंबा सफर कर सरकारी अस्पताल या निजी क्लीनिक में जा रहे हैं। वहीं प्रसव के लिए महिलाओं को निजी क्लीनिक में ले जाते हैं। ताकि जन्म के बाद बच्चों को परेशानी न हो। मालूम हो कि यह सुविधा मिलने से गरीबों को काफी राहत थी। जिले की बड़ी आबादी का इलाज और दवा इस यूनिट के माध्यम से हो रहा था। ग्रामीणों ने सरकार से अनुरोध किया है कि पुन: इसे चालू कराया जाए ताकि गांवों तक के लोगों का समुचित इलाज संभव हो सके।


