श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से श्री गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ कर्मजीत सिंह को 15 दिन के अंदर पेश होने और स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए हैं। वीसी डॉ कर्मजीत सिंह की एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें वो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सामने खड़े होकर जवाब दे रहे थे। हालांकि वीसी की ओर से एक जारी बयान में उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार हो रहा है। श्री अकाल तख्त ने अपने आदेश में कहा कि आपको सूचित किया जाता है कि श्री अकाल तख्त साहिब में आपके विरुद्ध लिखित शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि आपने दक्षिण भारत में आयोजित एक समारोह के दौरान सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। प्राप्त शिकायतों और मीडिया में वायरल हुए आपके वीडियो के अनुसार, आपने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में एक पीठ के संशोधन के माध्यम से सिखों के अद्वितीय अस्तित्व के विरुद्ध आवाज उठाई है, जो गुरमत के अनुरूप नहीं है। इस संबंध में, आदरणीय सिंह साहिब जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब जी के आदेशानुसार, आपको पंद्रह दिनों के भीतर कार्यालय सचिवालय श्री अकाल तख्त साहिब में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर इस संबंध में अपना लिखित स्पष्टीकरण देना है। समिति से निकाला था
इससे पहले एसजीपीसी ने जत्थेदारों के सेवा नियमों के लिए गठित कमेटी से वीसी डॉ. करमजीत को हटाया था। इस मामले को जालंधर के विधायक प्रगट सिंह ने उठाया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वीसी डॉ कर्मजीत सिंह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सामने स्टेज के नीचे खड़े हैं और यूनिवर्सिटी से संबंधित जानकारी ओर कोर्स शेयर कर रहे हैं। इस मामले का संज्ञान लेते हुए एसजीपीसी ने जीएनडीयू के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के सेवा नियमों के संदर्भ में गठित कमेटी से हटा दिया था। एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह ने बताया था कि ऐसा डा. कर्मजीत सिंह द्वारा आरएसएस प्रमुख के साथ की गई चर्चा के दौरान सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने के नतीजतन किया गया है।


