भास्कर न्यूज | जशपुरनगर चार साल पहले जब जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में 100 फीट ऊंचा तिरंगा झंडा फहराया था और उस साल हर गांव, घाटियों में बसे छोटे-छोटे कस्बों में तिरंगा झंडा लहराया तो मेरा सीना गर्व से ऊंचा हो गया। मेरी पोस्टिंग उस वक्त बीएसएफ की 16 वीं बटालियन में बतौर इंस्पेक्टर वहां ड्यूटी कर रहा था। आजादी का पर्व गांव–गांव में हर्षोल्लास के साथ बिना किसी डर और बाधा के मनाया जा सके, इसके लिए महीने भर पहले से ही पाकिस्तान की हर सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई थी। हर संदिग्ध से पूछताछ और देश विरोधी बयान या कार्यों पर तत्काल धर पकड़ की कार्रवाई तेज थी। यह बातें रिटायर्ड आर्मी जवान सुंदर सिंह भगत ने भास्कर से बातचीत के दौरान बताई। सुंदर साय भगत मनोरा विकासखंड के ग्राम केसरा के निवासी हैं। साल 2024 में बीएसएफ से रिटायर होने के बाद वह अपने घर में रहकर खेती का काम कर रहे हैं। उन्होंने आजादी के बाद से अबतक के बदलाव पर कहा कि 15 अगस्त 1947 से लेकर अबतक जो सबसे बड़ा बदलाव है, वह यह है कि अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर कोने में तिरंगा लहराता है। इससे पहले जम्मू कश्मीर का इलाका इससे अछूता था। आर्टिकल 370 हटने से पहले तक सिर्फ जिला मुख्यालय और कुछ चुनिंदा जगहों पर झंडा वंदन होता था। आर्टिकल 370 हटने के बाद के साल में सुंदर सिंह भगत बीएसएफ की 16 वीं बटालियन में जम्मू कश्मीर में तैनात थे। उन्होंने कहा कि देश की सरहद पर तैनात होकर देश की सुरक्षा करते हुए देश की सेवा का अवसर नसीब वालों को मिलता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने युवावस्था में एक बार आर्मी में जाने के बारे में जरूर सोचना चाहिए।


