आदिवासी-मूलवासी संगठनों ने की मांग, सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच हो

स्वर्गीय सूर्या नारायण हांसदा के एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए विभिन्न आदिवासी-मूलवासी संगठनों ने बुधवार को कैंडल मार्च निकाला। मार्च में शामिल सभी संगठनों ने सूर्या हांसदा को श्रद्धांजलि दी और एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की। कैंडल मार्च जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकल कर भारी भीड़ के साथ शहीद अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा और सूर्या हांसदा के लिए नारा लगाया। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, तब तक सूर्या नारायण हांसदा का नाम रहेगा, सूर्या हांसदा अमर रहे जैसे नारे लोग लगा रहे थे। कैंडल मार्च के दौरान विभिन्न आदिवासी संगठनों ने सूर्या हांसदा जी के न्याय के लिए राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग की। सामाजिक कार्यकर्ता निरंजना हेरेंज टोप्पो ने कहा कि जिस तरह से स्व. सुर्या नारायण हांसदा जी के परिवार के लोगों का आरोप है कि मृत शरीर पर चोट के निशान और जले के निशान देखे गए वो कहीं से भी एनकाउंटर का नहीं लग रहा है। बल्कि उसको थर्ड डिग्री टार्चर देने के बाद गोली मारी गई है। सामाजिक अगुवा कुंदरसी मुंडा और फूलचंद तिर्की ने कहा कि संथाल आदिवासियों की आवाज और गुरु जी शिबू सोरेन की राह पर चलने वाले, अपने जल जंगल जमीन की लड़ाई लड़ने वाला, गरीबों के लिए मुफ्त शिक्षा के लिए विद्यालय खोलने वाला व्यक्ति कुख्यात अपराधी नहीं हो सकता है। इसलिए उनकी मौत की सीबीआई जांच होनी चाहिए। जांच नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन करेगा समाज निशा भगत, हर्षिता मुंडा और रवि मुंडा ने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, अपने राज्य के आदिवासी बेटा सूर्या हांसदा के परिवार वालों के लिए अब तक कोई संवेदना व्यक्त नहीं करना बड़ा ही अचंभित करने वाली बात है। उन्होंने कहा कि अपने ही राज्य के सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने ही पुलिस प्रशासन के हाथों एनकाउंटर कराना मतलब इस राज्य को जंगल राज बनाना है, अगर सूर्या हांसदा जी को न्याय दिलाना है तो उनकी मौत का सीबीआई जांच कराएं मुख्यमंत्री, अन्यथा आदिवासी मूलवासी समाज चरणबद्ध आंदोलन करने को तैयार होंगे। इस मौके पर डब्लू मुंडा, निशा भगत, हर्षिता मुंडा, सिम्मी तिर्की, सुरेन्द्र लिंडा, छोटू टोप्पो, मंजुला गाड़ी, रवि मुंडा एवं सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। न्याय मिलने तक नहीं भूलेगा आदिवासी समाज लक्ष्मी नारायण मुंडा एवं डब्लू मुंडा जी ने संयुक्त रूप से कहा कि झारखंड की आदिवासी-मूलवासी समाज सूर्या हांसदा के दर्दनाक मौत को तब तक नहीं भूलेगी जब तक उनको न्याय नहीं मिल जाता है और उनके हत्यारों को सजा नहीं मिल जाती है।

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