झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को रिम्स की लचर व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रिम्स की व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत ने रिम्स शासी परिषद (जीबी) की बैठक 8 से 14 सितंबर के बीच करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन की ओर से अदालत को रिम्स के एक्ट और नियमावली की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि नियमानुसार वित्तीय अधिकार निदेशक के पास है। इस पर अदालत ने कहा कि हमें एक्ट या रूल नहीं बताएं। हम यह जानना चाहते हैं कि रिम्स की लचर व्यवस्था को कैसे सुधारा जा सकता है? गरीब मरीजों को बेहतर और सुगम इलाज कैसे संभव होगा? सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी और रिम्स की जांच करने वाले अधिवक्ताओं से पूछा कि व्यवस्था कैसे ठीक होगी। प्रार्थी और राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि रिटायर जज की निगरानी में बैठक हो। इस पर अदालत ने हाईकोर्ट के रिटायर जज को बैठक का आब्जर्वर नियुक्त करने का निर्देश दिया। शासी परिषद की बैठक में जो निर्णय लिया जाएगा, उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी। जीबी की बैठक में कमेटी के बिंदुओं को भी रखने का निर्देश अदालत ने कहा कि रिम्स की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शासी परिषद की बैठक में अधिवक्ताओं की कमेटी द्वारा रिम्स का निरीक्षण करने के बाद जिन बिंदुओं को उठाया गया है, उसे भी रखा जाए। कोर्ट ने कहा कि रिम्स के सुझाव और हाईकोर्ट के वकीलों की कमेटी की रिपोर्ट शासी परिषद के सभी 15 सदस्यों को उपलब्ध कराई जाए। बैठक में लिए गए निर्णय कोर्ट में पेश किए जाएं। अदालत ने रिम्स निदेशक को वैसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जो नन प्रैक्टिस भत्ता लेने के बावजूद निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।


