भास्कर न्यूज | अमृतसर पूरे देश में इस समय राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा (25 अगस्त से 8 सितंबर) मनाया जा रहा है। सरकार और स्वास्थ्य संस्थान लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि किसी की अंधेरी जिंदगी में रोशनी लाई जा सके लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अमृतसर के आई एंड ईएनटी अस्पताल में आज भी 253 मरीज आंखों की रोशनी पाने के लिए वेटिंग लिस्ट में फंसे हुए हैं। जिसकी मुख्य वजह डोनरों की कमी है। आई एंड ईएनटी अस्पताल के मुखी एवं जीएनडीएच के एमएस डॉ. करमजीत सिंह ने बताया कि यहां हर साल औसतन 100 मरीजों की कॉर्निया ट्रांसप्लांटेशन की जाती है। लेकिन डोनर की भारी कमी के कारण बाकी मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि दुनिया देखने की चाहत लिए 253 लोग यहां वेटिंग लिस्ट में हैं, लेकिन आंख दान करने वालों की संख्या बहुत कम है। डॉक्टरों के अनुसार, आंख की रोशनी गंवा चुके मरीज रोजाना अस्पताल के चक्कर काटते हैं। उनमें से कई ऐसे हैं जो पिछले दो से तीन साल से वेटिंग लिस्ट में हैं। डॉक्टर के मुताबिक 45 वर्षीय मरीज हादसे में अपनी आंखों की रोशनी खो बैठा है। उन्हें बताया गया था कि नेत्रदान से फिर से देख सकता है, लेकिन अब तक वह सिर्फ इंतजार ही कर रहा है। एमएस डॉ. सिंह ने बताया कि अगर लोग अपनी मौत के बाद आंखें दान करने की प्रतिज्ञा लें तो हजारों जिंदगियां बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि नेत्रदान ऐसा दान है, जिसमें न कोई खर्च है, न किसी को नुकसान। लेकिन इससे किसी अंधेरे में जी रहे इंसान की जिंदगी बदल सकती है। उन्होंने बताया कि जो भी व्यक्ति अपनी आंखों का दान करता है, उसकी आंखों का कार्निया मृत्यु के छह घंटों के भीतर ही निकालना पड़ता है। क्योंकि उसके बाद कार्निया खराब हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि दानकर्ता की खुद की आंखों की रोशनी चाहे काफी कम हो या फिर उसकी उम्र ही 70 से 80 साल ही क्यों न हो। उसकी आंखों के कार्निया से किसी भी मरीज की आंखों की रोशनी को लौटाया जा सकता है। नेत्रदान पखवाड़े के दौरान आई एंड ईएनटी अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। डॉक्टरों और सामाजिक संस्थाओं ने लोगों से अपील की है कि वे आगे आएं और नेत्रदान करें। क्योंकि हर दाता सिर्फ दो आंखें ही नहीं देता, बल्कि किसी की पूरी जिंदगी में उजाला भर देता है।


