झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया सहित सभी छोटे खनिज खदानों के आवंटन पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मंगलवार को प्रार्थी आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पेसा नियमावली लागू करने में हो रही देरी पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। सचिव की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह समय देने की मांग की गई, लेकिन अदालत ने दो सप्ताह का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है। – शेष पेज 11 पर राज्य गठन से पहले 1996 में बना पेसा कानून, 25 सालों में लागू नहीं हुआ झारखंड राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ था, लेकिन पेसा कानून वर्ष 1996 में ही बन गया था। राज्य बनने के 25 साल बाद भी सरकार इसे लागू नहीं कर पाई। हाईकोर्ट ने जुलाई 2024 में कई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को दो माह में नियमावली बनाकर पेसा कानून लागू करने का आदेश दिया था।


