भास्कर न्यूज | जालंधर सनातन धर्म महिला महाविद्यालय, जालंधर संस्कृत भारती एवं गुरु विरजानंद गुरुकुल महाविद्यालय करतारपुर द्वारा संस्कृत संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में बतौर मुख्यअतिथि कुंवर विजय प्रताप पहुंचे। जबकि पद्मश्री प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी ने की। प्रो. बेदी ने कहा कि संस्कृत और पंजाबी भाषा का अटूट संबंध है। संस्कृत और पंजाबी के आख्यानों में अद्भुत समानता है। जितने आख्यान, कथाएं और कहानियां संस्कृत में मिलती हैं, उनका पूर्ण अनुवाद पंजाबी में भी उपलब्ध है। मुख्य अतिथि कुंवर विजय प्रताप ने कहा कि मैंने स्वयं संस्कृत के माध्यम से ही आईपीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। इसने मुझे जीवन में धैर्य और उसके वास्तविक अर्थ को समझाया। उद्घाटन सत्र में सारस्वत अतिथि के रूप में डीएवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज कुमार उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत और पंजाबी के संबंध को जीवित रखने के लिए शिक्षण संस्थानों एवं सरकारों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। गुरुकुल करतारपुर के आचार्य डॉ. उदयन आर्य ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करवाए जाएंगे। यहां प्रो. नवीन चंद्र, डॉ. जसप्रीत कौर, आचार्य पुष्पराज रहे। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के आचार्य वेदव्रत ने की। मुख्य वक्ता डॉ. कुलदीप आर्य एवं प्रो. विशाल भारद्वाज रहे। अतिथि के रूप में पंजाब प्रांत संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री संजीव श्रीवास्तव उपस्थित थे। वेदव्रत ने कहा कि पंजाब जिसे प्राचीन काल में सप्तसिंधु प्रदेश कहा जाता था, उसकी सांस्कृतिक जड़ों में संस्कृत गहराई से विद्यमान है। तृतीय सत्र में भी कई विद्वानों ने संस्कृत और पंजाबी संबंधों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। संगोष्ठी से पूर्व केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र के अध्यापक भगवती प्रसाद ने सरल माध्यम से संस्कृत सीखने की विधियां बताईं। इस अवसर पर गुरुकुल के अध्यापक जीवन जोत, जितेन्द्र, कमलदीप, पवन जोशी, संतोष तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।


