भास्कर न्यूज | जांजगीर बिना लाइसेंस के एलोपैथिक दवाइयों का भंडारण और बिक्री करने के मामले में शारदा मेडिकल स्टोर्स जांजगीर के संचालक बजरंग साहू को दोषी ठहराते हुए विशेष न्यायाधीश(औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम) जांजगीर ने तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनवाई है। साथ ही ₹10,000 का जुर्माना सुनाया गया है। यह कार्यवाही खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से प्राप्त एक सूचना पर आधारित छापेमारी के बाद हुई। छापे के दौरान साहू के आवासीय परिसर से अवैध रूप से संग्रहित एलोपैथिक दवाइयां बरामद की गईं, जिनके लिए आरोपी कोई वैध दस्तावेज या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बजरंग साहू ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 18-सी का उल्लंघन करते हुए बिना लाइसेंस के दवाइयों का व्यापार किया, जो कि धारा 27(बी)(ii) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह टिप्पणी की कि बिना लाइसेंस के दवाइयों का विक्रय न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह जनता के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। विशेष न्यायाधीश ने बजरंग साहू को दोषी करार देते हुए उसे तीन वर्ष का सश्रम कारावास और ₹10,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी को ₹1,00,000 का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है, जो औषधि अधिनियम के उल्लंघन के तहत निर्धारित किया गया था। मामले की अभियोजन की ओर से पैरवी धीरज कुमार शुक्ला ने की।


