विजन 2047:​लेखा-जोखा पर मंथन आज… ताकि उस हिसाब से जीएसटी में हिस्सा मांगें

6 और 7 मार्च को मप्र में होगा 16वें वित्त आयोग का दौरा प्रदेश सरकार के तमाम विभाग वित्त विभाग के साथ सोमवार को 16वें वित्त आयोग के लिए बन रहे मेमोरेंडम पर चर्चा करेंगे। मप्र सरकार के विजन 2047 के हिसाब से विभागों की जरूरतों का लेखा-जोखा बनाया जा रहा है ताकि उस हिसाब से केंद्र से जीएसटी में हिस्सा मांगा जा सके। इस संबंध में फरवरी के अंत में होने वाला वित्त आयोग के सदस्यों का दौरा अब 6 -7 मार्च को होगा। भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की वजह से यह बदलाव हुआ है।

बीते शुक्रवार को हुई बैठक में वित्त विभाग ने अन्य विभागों को 16वें वित्त आयोग से जुड़ी उनकी वित्तीय जरूरतों का प्रेजेंटेशन सौंपा था। वित्त की तरफ से निजी कंसल्टेंसी फर्म यह प्रस्ताव बना रही है। सोमवार को दोबारा बैठक होगी, इसमें विभाग अपने प्रस्ताव पर फीडबैक देंगे कि वित्तीय जानकारी सही हैं और क्या उनके कोई सुझाव हैं? इसके बाद सभी प्रस्तावों को जोड़कर एक मेमोरेंडम बनेगा, जिसका प्रेजेंटेशन मार्च में आने वाली वित्त आयोग की टीम के सामने होगा। स्पेशल ग्रांट की मांग कर सकती है सरकार 16वें वित्त आयोग में राज्य सरकार की मांग के आधार पर विशेष प्रोजेक्ट के लिए स्पेशल ग्रांट की मांग भी की जा सकती है। उद्योग, नगरीय प्रशासन और ग्रामीण विकास के लिए इस पर विचार हो रहा है। आयोग के सामने प्रेजेंटेशन में उन योजनाओं पर भी बात होगी, जिनसे मप्र में विकास में मदद मिली। शुक्रवार को हुई बैठक में विभागों से सिंचाई, कृषि, शिक्षा, नगरीय विकास, स्वास्थ्य की ऐसी सफल योजनाओं के बारे में पूछा गया। जो योजनाएं खास सफल नहीं रहीं, वित्त आयोग उन्हें बंद करने पर भी विचार करेगा। 2026 से 2031 तक होगा आयोग का कार्यकाल 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल 2026 से 2031 तक होगा। इस अवधि के लिए मप्र की जरूरतों और प्रदेश के जनता के प्रति जिम्मेदारियों को पूरा करने लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता का आकलन किया जा रहा है। आयोग मुख्य रूप से केंद्र सरकार ये सिफारिशें देगा कि केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स के जरिए होने वाले नेट इनकम के वितरण का फॉर्मूला (शेयर अनुपात) क्या हो। केंद्र की संचित निधि में से राज्यों को दिए जाने वाली राजस्व सहायता अनुदान पर पर कितना नियंत्रण रखा जाए, किस प्रयोजन के लिए कितनी राजस्व सहायता राज्य को देना जरूरी है। राज्यों की संचित निधि बढ़ाने और आपदा प्रबंधन निधि की समीक्षा भी होगी। ^ मप्र के विजन 2047 के हिसाब से विभागों की वित्तीय जरूरतों के हिसाब से प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं। इन्हें मेमोरेंडम में शामिल किया जाएगा, जिसका प्रेजेंटेशन आयोग के सामने होगा।
– तन्वी सुंद्रियाल, डायरेक्टर बजट

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