खुद चला रहीं ट्रैक्टर, कर रहीं खेती तो किसी ने बागवानी में हाथ आजमाया

मनोज सिन्हा | सिमडेगा आम लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने को लेकर सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के कम प्रभावी या असफल होने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि कई लाभुक इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। कई लाभुक मिली हुई राशि को इधर-उधर खर्च कर बर्बाद कर देते हैं, जिससे वे खुद भी सवालों के कटघरे में आ जाते हैं और योजनाएं भी धरातल पर नहीं उतर पाती हैं। ऐसी स्थिति में जिले की कई महिलाएं लोगों के सामने उदाहरण पेश कर रहे हैं कि यदि सरकार के द्वारा दी गई राशि का सदुपयोग किया जाए और मेहनत की जाए तो गरीबी की दलदल से बाहर निकाला जा सकता है। कोलेबिरा के डोमटोली टैंसेरा निवासी लाली देवी वर्ष 2014 में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं।उन्होंने वर्ष 2014 में सब्जियों का उत्पादन शुरू किया और सब्जियों की दुकान खोली। जेएसएलपीएस के सहयोग से उन्हें भूमि संरक्षण विभाग से ट्रैक्टर मिला। अब वह इस ट्रैक्टर से खुद अपने खेतों में और दूसरे किसानों के खेतों में भी जुटा का काम करती हैं। दोनों कामों से उन्हें 25000 रु से अधिक की आय प्रतिमाह हो जाती है। मेहनत और लगन से किस तरह से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। इसका उदाहरण केरसई प्रखंड के किनकेल निवासी रोशनी कुजूर ने भी प्रस्तुत किया है। उन्होंने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत वर्ष 2017 और 2020 में कुल 224 आम के पेड़ लगाए। आम बागवानी के साथ ही उन्होंने इसी स्थल पर कई तरह की सब्जियों का उत्पादन किया। अभी पिछले आम के मौसम में उन्होंने आम और सब्जियों की बिक्री कर एक लाख रु से अधिक की आय अर्जित की है। इन दीदियों की सफलता की कहानी अपने आप में एक उदाहरण है कि मजबूत इच्छा शक्ति, मेहनत और लगन के साथ ही योजनाओं की राशि का सही उपयोग कर किस तरह जीवन की दिशा को बदला जा सकता है। जलडेगा के पतिअंबा निवासी राधा देवी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई है। उन्होंने वर्ष 2016 में बैंक सखी पद के लिए परीक्षा दी थी और अब वे झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक की बैंक सखी हैं। वे समूहों का खाता खोलने, बैंक लिंकेज करने, व्यक्तिगत खाता खोलने, पीएमएसबीवाई, पीएमजेजेबीवाई आदि योजनाओं का लाभ देने आदि का काम रही हैं। उन्होंने 2024-25 में 289 समूहों का बैंक लिंकेज कराया। बताया गया कि इस वर्ष झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक को गुमला डिवीजन में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ था। राधा देवी की आर्थिक स्थिति पहले ठीक नहीं थी लेकिन अब आर्थिक स्थिति ठीक करने के साथ ही उन्होंने समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त किया है।

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