भास्कर न्यूज । सिमडेगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में रविवार को व्यवहार न्यायालय सभागार में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण अधिनियम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन प्राधिकार के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा,अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह,पुलिस अधीक्षक एम.अर्शी सहित अन्य न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रधान जिला न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि मोटर दुर्घटनाओं में पीडितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया गया है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना की स्थिति में छह माह के भीतर दावा दायर करना अनिवार्य है। हिट एंड रन मामलों में भी मुआवजा देने की स्पष्ट व्यवस्था है। यदि दुर्घटना सरकारी वाहन से होती है तो राज्य सरकार पूर्ण मुआवजा प्रदान करती है। हत्या जैसे मामलों में विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत भी पीडितों या परिजनों को मुआवजा मिल सकता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मोटर दुर्घटना मामलों में कोर्ट फीस केवल 10 रुपए है, जिससे गरीब और असहाय न्याय की प्रक्रिया से जुड़ सकें। अपर जिला न्यायाधीश नरंजन सिंह ने मोटर दुर्घटना मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो मृतक की उम्र को ध्यान में रखते हुए 60 वर्ष तक की अनुमानित आय का आकलन कर ट्रिब्यूनल द्वारा मुआवजा निर्धारित किया जाता है। पुलिस अधीक्षक एम.अर्शी ने सड़क हादसों के मुख्य कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लगभग 60 प्रतिशत दुर्घटनाएं रफ्तार के कारण होती हैं।


