भास्कर न्यूज|कोडरमा संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना का व्रत जीवित्पुत्रिका व्रत (जिऊतिया) पर माताओं ने निर्जला उपवास रखा। यह तीन दिवसीय व्रत शनिवार को नहाय-खाय से प्रारंभ हुआ रविवार को व्रत के दौरान महिलाओं ने निर्जला उपवास रखा और गुरुवार को पारण के साथ इसे समाप्त करेंगी। पारण के दिन विशेष रूप से नोनी का साग, मडुआ की रोटी, और सतपुतिया जैसी पारंपरिक भोज्य पदार्थों का सेवन किया जाएगा। इस व्रत में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु और युगों तक पीढ़ी के चलते रहने की कामना करती हैं। झुमरीतिलैया, कोडरमा, सतगावां, डोमचांच, मरकच्चो, जयनगर, चंदवारा सहित विभिन्न इलाकों सहित शहर के स्टेशन रोड और सब्जी बाजारों में व्रत के लिए आवश्यक सामग्री की खरीदारी के लिए भारी भीड़ देखी गई। नोनी का साग और मडुआ का आटा पारंपरिक रूप से इस व्रत में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके पीछे वैज्ञानिक आधार भी है। नोनी का साग और मडुआ का आटा पेट के लिए लाभकारी होते हैं और व्रत के बाद इन्हें खाने से पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं के समर्पण और संतान की लंबी आयु की कामना का प्रतीक है।


