10 सालों से सड़क हादसों के घायलों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं सागर

भास्कर न्यूज|कोडरमा जिले की सीमा से सटे बिहार की ओर जाने वाली लगभग 14 किलोमीटर लंबी घाटी, जिसे लोग “मौत की घाटी के नाम से जानते हैं, आए दिन सड़क दुर्घटनाओं के कारण चर्चा में रहती है। इस घाटी में अब तक सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। लेकिन इन सबके बीच नौवामाइल के समीप एक छोटे से लाइन होटल का संचालन करने वाले सागर गिरी बीते 10 वर्षों से दुर्घटना पीड़ितों के लिए जीवनदूत बने हुए हैं। करीब 32 वर्षीय सागर गिरी का कहना है कि जब भी घाटी में हादसे की खबर मिलती है, वह अपने कामकाज को छोड़कर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचते हैं और घायल लोगों को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक पहुंचाने में जुट जाते हैं। अब तक वे लगभग 80 घायलों को समय पर चिकित्सकीय सुविधा दिलाकर उनकी जान बचा चुके हैं। कई बार तो एक ही दिन में उन्हें दो से तीन सड़क हादसों के पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ी है। मानवता की इस अनोखी सेवा के लिए सागर गिरी को कई बार परिवहन विभाग की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। उन्हें घायलों के इलाज में मदद करने के लिए सरकार द्वारा निश्चित राशि भी उपलब्ध कराई गई है। हाल ही में 15 अगस्त को भी उपायुक्त ने उन्हें नेक नागरिक” के रूप में सम्मानित किया। सागर गिरी का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से पीड़ितों की जान बचाना रही है, न कि केवल होटल चलाना। वे प्रशासन से लगातार यह मांग कर रहे हैं कि घाटी में एक एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध कराई जाए, ताकि हादसों के तुरंत बाद मौके पर ही घायलों का इलाज शुरू किया जा सके और उन्हें बेहतर जीवन रक्षक सुविधा के साथ अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

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