प्रतापनगर एनआरआई कॉलोनी को महल रोड से कनेक्ट करने के लिए जेडीए एक 24 मीटर चौड़ी सड़क बनाने जा रहा है, जबकि इसके 600 मीटर की दूरी में दो सड़कें 160 व 100 फीट चौड़ी सड़क हैं। इसको लेकर जेडीए प्लानिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जमीन कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए जेडीए ने सड़क अलाइनमेंट भी बदल दिया। इसमें एक बहुमंजिला इमारत का मंदिर और अनुमोदित कॉलोनी के मकान तोड़े जाने की तैयारी है। जेडीए ने खुद 2006 में बहुमंजिला इमारत और 2009 में कॉलोनी का नक्शा पास किया था। बहुमंजिला आवासीय इमारत की 40 फीट जमीन को इस सड़क के दायरे में ले लिया और इसमें चारदीवारी के अंदर सोसायटी का मंदिर बना है। जेडीए के अचानक अलाइनमेंट बदलकर सड़क निकालने के प्रस्ताव के बाद सोसायटी में फ्लैट आवंटियों में हड़कंप मच गया है। सोसायटी और प्रभावित कॉलोनी अशोक विहार के निवासियों ने जेडीए की इस मंशा का विरोध शुरू कर दिया है। जोन ने प्रस्ताव ही नहीं दिया; 2010 में पीडब्ल्यूसी मीटिंग में प्रस्ताव पास कर दिया 2011 में बने मास्टर प्लान में यह सड़क शामिल नहीं थी। जेडीए का दावा है कि 25 जून 2010 को पीडब्ल्यूसी मीटिंग में इस सड़क के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। प्रभावित भूखंडधारियों का दावा है कि सड़क बनाने के लिए जोन और टाउन प्लानिंग की तरफ से कोई प्रस्ताव ही नहीं आया और पीडब्ल्यूसी मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। 600 मीटर दूरी पर पहले से मौजूद 2 बड़ी सड़कें अशोक विहार बी और आसपास की कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि 600 मीटर दूरी पर ही 160 फीट और 100 फीट चौड़ी दो सड़कें पहले से हैं, जो सीधे जगतपुरा महल रोड से कनेक्ट करती हैं। ऐसे में तीसरी सड़क की कोई जरूरत नहीं है। कुंभा मार्ग से जोड़ने के नाम पर भी ‘कर्व’सड़क को कुंभा मार्ग से जोड़ने का दावा किया गया, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने 10 मीटर का कर्व डालकर अलाइनमेंट बदला, जिससे बहुमंजिला इमारत और मंदिर प्रभावित होने लगे। कॉलोनी को गैर-अनुमोदित बताकर स्वीकृति आरोप है कि तत्कालीन जेडीए अधिकारियों ने अशोक विहार बी योजना (2009 में अनुमोदित) को प्रस्ताव में गैर-अनुमोदित बताकर सड़क पास करवा ली। इससे बहुमंजिला इमारत की 40 फीट जमीन और सोसायटी का मंदिर सड़क की जद में आ रहा है। इस मामले को लेकर भास्कर ने जोन 9 उपायुक्त तारामती वैष्णव से बात करनी चाही लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।


