घाघरा|घाघरा प्रखंड क्षेत्र के इटकीरी ग्राम में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां के किसान लक्ष्मण उरांव, जो फाइलेरिया रोग के कारण विकलांग हैं और लाठी के सहारे चलते हैं, उनकी पूरी मेहनत और सालभर की उम्मीदें कुछ ही घंटों में राख हो गईं। लक्ष्मण ने अपना चाचा गन्दूर उरांव व चचेरा भाई गोविंदा उरांव पर आरोप लगाया है। लक्ष्मण ने बताया कि उसका चाचा व चचेरा भाई उनकी धान की पूरी फसल पर जहरीली दवा छिड़क दी जिससे करीब 5 एकड़ जमीन पर तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। लक्ष्मण उरांव ने बताया कि वे अपने पूरे परिवार की आजीविका केवल खेती पर ही निर्भर करते हैं। लक्ष्मण ने कड़ी मेहनत और कर्ज के बोझ के बीच 4 अलग-अलग जगहों पर धान की खेती की थी। पहले से ही धान का बिछड़ा तैयार किया था, उसमें भी उनके चाचा और चचेरे भाई ने जहरीली दवा डाला था जिससे पूरा बिचड़ा बर्बाद हुआ था। जिसके बाद लक्ष्मण इधर-उधर से पौधा जुटाकर करीब 5 एकड़ जमीन में रोपा रोपवाया था। महीनों की कठिन मेहनत के बाद अब धान की फसल पूरी तरह पकने की स्थिति में थी, तभी एक बार फिर पूरी फसल पर जहरीली दवा छिड़क दी गई। जिससे पूरा फसल बर्बाद हो गई। लक्ष्मण की आंखों में आंसू हैं और वे बार-बार यह सवाल कर रहा हैं कि आखिर अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेगा। विकलांग होने के कारण वे मजदूरी भी नहीं कर पाता और खेती ही उनके जीवन का सहारा था। लक्ष्मण ने कहा पूरे साल परिवार इसी फसल पर निर्भर रहता है, अब सबकुछ खत्म हो गया। विकलांग किसान के लिए खेती केवल रोजगार नहीं थी, बल्कि जीवन का सहारा था, जिसे उसके चाचा व चचेरा भाई ने पूरी तरह छीन लिया। लक्ष्मण ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और आजीविका के लिए मदद का गुहार भी लगाई है। भास्कर न्यूज |गुमला सदर प्रखंड के ग्राम पंचायत मुरकुंडा के जाम टोली में रविवार को खड़िया समाज की सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रभु खड़िया ने की। बैठक में समाज के वरिष्ठ सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक में सुदेश खड़िया ने कहा कि खड़िया समाज की स्थिति आज बहुत दयनीय है। उन्होंने बताया कि मैट्रिक और प्लस-टू स्तर पर अन्य भाषाओं की पढ़ाई के लिए शिक्षकों के पद सृजित किए जा रहे हैं, लेकिन खड़िया भाषा के लिए कोई सरकारी पहल नहीं की जा रही। समाज के लोग अपने स्तर से बच्चों को पढ़ाकर मैट्रिक और इंटर के परीक्षा दिलाने को मजबूर हैं। सुदेश खड़िया ने आगे कहा कि समाज ने विधायक, मंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन के माध्यम से और व्यक्तिगत रूप से इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक किसी ने भी समाज की आवाज़ नहीं सुनी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर समाज को अपने बच्चों की शिक्षा और भाषा का संरक्षण करना है, तो इसके लिए अब हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़नी होगी और संवैधानिक अधिकारों को प्राप्त करना हमारी जिम्मेदारी है।बैठक में सुरेश खड़िया ने कहा कि समाज के लोग मिलकर चंदा एकत्र करेंगे और खड़िया भाषा की पढ़ाई को सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए प्रत्येक गांव में समिति का गठन किया जाएगा और बच्चों को खड़िया भाषा में पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि भाषा का संरक्षण हो और समाज का अस्तित्व सुरक्षित रहे। बैठक में राजेश खड़िया, प्रभु खड़िया, मंगल खड़िया, अनिल खड़िया, राजेश खड़िया, जोगिंदर खड़िया, सनी खड़िया, विदाई खड़िया, लोदो खड़िया, राजू खड़िया, भादवा खड़िया, पुनीत खड़िया, पुष्पा खड़िया और पुणे खड़िया,पूना खड़िया, बिनोद खड़िया, महावीर खड़िया, सहित ग्राम पंचायत के कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने समाज की भाषा और संस्कृति को बचाने का संकल्प लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि खड़िया समाज अपने बच्चों को अपनी भाषा में शिक्षित करने और इसे संरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। यह पहल समाज की एकता और अपनी पहचान को बचाने का प्रयास है।


