पत्थलगड़ा| शारदीय नवरात्र के पहले दिन पत्थलगडा में विशाल कलश यात्रा निकाली गई।चहुंओर आस्था और भक्ति का माहौल बना हुआ है।आज प्रखंड मुख्यालय में सुभाष चौक पत्थलगडा, नावाडीह बाजोबार, नोनगांव पंचायत मुख्यालय, कौलेश्वर स्थान कुब्बा और उपरैली कुबा में कलश यात्रा निकाली गई। प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल लेंबोईया पहाड़ी में भी कलश स्थापित कर मां भगवती की विधिवत पूजा अर्चना शुरू हो गई है। प्रखंड मुख्यालय में कलश यात्रा निकाली गई। लावालौंग | काफी लंबे अर्से के बाद लावालौंग प्रखंड के विभिन्न पूजा पंडालों के कलश यात्रा में डीजे की जगह पौराणिक वाद्ययंत्रो को प्राथमिकता दी गई।युवा जागृति क्लब दुर्गा बांदु के द्वारा पौराणिक ढोल एवं सहनाई को आगे रखकर कलश यात्रा निकाला गया।वहीं प्रतिभा विकास मंच लावालौंग एवं हुटरू गाँव के पूजा समिति के द्वारा डीजे की युग में विलुप्त होते कैशियो और ढोल के साथ कार्यक्रम किया गया।बान्दू गाँव में आयोजन के आचार्य सत्यनारायण पाठक नें बताया कि आज के बदलते दौर में पूजा पाठ के अवसरों पर हम उन पौराणिक चीजों को छोड़ते और भूलते जा रहे हैं जिससे दर्जनों लोगों के परिवार और बच्चों का दशहरा जैसे मौके पर घूमने फिरने का खर्च निकल जाता था।गरीब तबके के ढोल बजाने वाले पंन्द्रह से बीस लोगों की टीम आयोजनों में बाजा बजाया करते थे।जिससे उनके भरण पोषण का आधार जुड़ा होता था। लेकिन आज हम उन सुहावने और मनमोहक वाद्ययंत्रो को भूलकर किसी के रोजी रोटी को नजरअंदाज कर रहे हैं।हमें अपनी संस्कृति में लौटकर जनहित और प्रकृति हित का कार्य करना चाहिए। खगेश्वर साहु ने बताया कि मांगलिक वेद मंत्रो के साथ नदी से जल लेकर वाद्ययंत्रो के साथ पूरे नगर भ्रमण करते हुए पूजा स्थल पर पहुंच कर कलश स्थापन किया गया। नीतीश कुमार,अमित कुमार,अजय यादव एवं गुड्डू कुमार साहू के द्वारा नि: शुल्क कलश वितरण एवं कलशधारिंयों के लिए शरबत पान का व्यवस्था कराया गया। भास्कर न्यूज|कोडरमा भारतीय सशस्त्र सेनाएं आदिकाल से ही पराक्रम और चैतन्य का प्रतीक रही हैं। जब भी भू-वैश्विक प्रभाव और आत्म-रक्षा की बात आई है, हमारी सेनाओं ने अदम्य साहस और अजेय पराक्रम का प्रदर्शन किया है। इन्हीं अजेय सपूतों को गढ़ने में सैनिक स्कूल तिलैया की भूमिका पिछले छह दशकों से अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इस संस्थान ने राष्ट्र को ऐसे अनेक वीर सपूत दिए हैं जिन्होंने देश की रक्षा और विकास पथ पर उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया है। इन्हीं वीर सपूतों में एक हैं ऑपरेशन सिंदूर के सेनानायक, सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और वायु सेना मेडल से अलंकृत एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती। वे सैनिक स्कूल तिलैया के 1977-83 बैच के छात्र रहे हैं और 1987 में कमीशन प्राप्त कर अब तक 38 वर्षों से राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में वे जून 2025 से ‘डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ’ के पद पर कार्यरत हैं। सैनिक स्कूल तिलैया के इस गौरवशाली पूर्व छात्र ने हाल ही में विद्यालय का दौरा किया। उनका यह आगमन विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा। एयर मार्शल भारती ने सबसे पहले ‘अमर तिलैयन’ स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और विशेष प्रातःकालीन सभा में छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से स्वयं की पहचान करने, समय का सदुपयोग करने और आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमताओं का विकास करने का आह्वान किया। विशेष अवसर पर उन्होंने पूर्व रसायन शास्त्र शिक्षक डी. मैती तथा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ अध्यापक मनोरंजन पाठक को सम्मानित किया। साथ ही इंटर हाउस क्रॉस कंट्री प्रतियोगिता की रोलिंग ट्रॉफी कक्षा 10 की छात्रा भूमि को प्रदान की। दौरे के दौरान उन्होंने विद्यालय की गतिविधियों का अवलोकन किया, छात्रों से वार्ता की और कैडेट मेस में प्रीति भोज में भी शामिल हुए। कार्यक्रम की मुख्य श्रृंखला में कर्नल प्रणव स्टेडियम में ‘आर्चरी एरेना’ का उद्घाटन, विद्यालय परिसर का परिभ्रमण और शैक्षिक उन्नति पर परिचर्चा शामिल रही। प्राचार्य कर्नल एस. मोहनराव आर. ने ए कहा कि उनका यह दौरा छात्रों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और इससे उनमें कर्तव्य, आत्मविश्वास बढे़गा।


