भास्कर न्यूज | अमृतसर शहर में चल रही भगवान जी की रामलीला में कई दृश्यों का मंचन किया। भल्ला कॉलोनी रामलीला ड्रामा ट्रिक क्लब की ओर से रात साढ़े 9 बजे आरती करके रामलीला का मंचन किया। राजा दशरथ अपने मंत्रियों के साथ दरबार में विराजमान है। इसी दौरान श्रवण राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं। इसी दौरान श्रवण को अपने माता-पिता के अंधे होने के कारण का पता चलता है। जिसे सुनकर वह माता-पिता को 64 तीर्थों की यात्रा करवाने की बात कहता है। राजा दशरथ श्रवण को हाथी घोड़े और पालकी लेकर जाने की बात कहते हैं। परंतु श्रवण अपने कंधे पर बंहगी रखकर उसमें अंधे माता-पिता को उसमें बैठाकर तीर्थ यात्रा को ले चलता है। राजा दशरथ सरयू नदीं के किनारे शिकार को जाते हैं। जैसे ही नदीं से आवाज आती है और राजा दशरथ आवाज की तरफ शब्दभेदी बाण चलाता है जो पानी भर रहे श्रवण को लगता है। बाण लगते ही श्रवण तड़पने लगता है। दशरथ वहां पहुंचता है तो श्रवण को बाण लगा देखकर हैरान हो जाता है। श्रवण राजा को अपने प्यासे माता पिता को पानी देकर आने की बात करते प्राण त्याग देता है।


