बांसवाड़ा में 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दौरा प्रस्तावित है। इस मौके पर बड़ी संख्या में चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ से लोगों को सभा स्थल तक ले जाने के लिए बसों का इंतजाम किया जा रहा है। चित्तौड़गढ़ जिले से करीब 7 हजार और प्रतापगढ़ जिले से लगभग 20 हजार लोगों को बांसवाड़ा ले जाने का टारगेट तय किया गया है। इसी वजह से चित्तौड़गढ़ RTO ने मंगलवार दोपहर अचानक स्कूल बसों को रोकना शुरू कर दिया। RTO की अधिग्रहण की कार्रवाई के तहत स्कूल बसों की जांच की गई और जिनमें खामियां पाई गईं, उनका चालान काटा गया। कई बसों में न तो परमिट मिले और न ही फिटनेस पूरी थी। अधिकारियों का कहना है कि सभा में बड़ी संख्या में लोगों को ले जाने के लिए बसों की जरूरत होगी, इसलिए पहले से ही अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। RTO इंस्पेक्टर शकील ने बताया कि जांच का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि यदि बसें बिना परमिट या फिटनेस के चल रही हैं, तो यह बच्चों की जान के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए कार्रवाई दो स्तरों पर की जा रही है पहली, बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और दूसरी, प्रधानमंत्री के दौरे के लिए बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तय की गई है। परमिट नहीं होने पर जुर्माने की कार्रवाई
हालांकि इस कार्रवाई के चलते बच्चों को परेशानी भी हुई। दोपहर की धूप में जब स्कूल से घर लौटते समय बसों को रोक लिया गया। बच्चे काफी समय तक बसों में बैठे रहे। देरी के कारण कई बच्चे भूखे भी थे और समय पर घर नहीं पहुंच पाए। अभिभावकों को भी चिंता रही कि आखिर बच्चे कहां रह गए। नियमों के अनुसार यदि किसी बस के पास परमिट नहीं है तो उस पर 5 हजार से 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाता है। वहीं फिटनेस पूरी न होने पर 5 हजार रुपए का जुर्माना तय है। कई बसों पर इसी तरह की कार्रवाई की गई। बस चालकों और स्कूल प्रबंधन का कहना है कि अचानक हुई इस कार्रवाई ने मुश्किलें बढ़ा दीं। उनका कहना है कि यदि बसों की जांच करनी ही थी तो इसके लिए ऐसा समय चुना जाना चाहिए था, जब बच्चे उसमें सवार न हों। प्रधानमंत्री के दौरे को सफल बनाने और लोगों को सभा स्थल तक पहुंचाने के लिए बसों का अधिग्रहण जरूरी है, लेकिन जिस तरह से दोपहर में बच्चों को रोके गए वाहनों में इंतजार करना पड़ा, उसने अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।


