कोर्ट ने जताई चिंता, कहा:दोनों ना भावनात्मक रूप से समझदार ना आर्थिक रूप से स्वतंत्र फिर भी लिव-इन में रहने का निर्णय लिया

19 साल के युवक-युवती ने यह कहते हुए हाई कोर्ट में याचिका लगाई कि उन्हें परिजनों से खतरा है। युवक की आयु 21 साल से कम होने के चलते वह शादी नहीं कर सकता, लेकिन दोनों लिव-इन में रह रहे हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ग्वालियर एसपी, थाना प्रभारी मुरार और चीनौर को दोनों की आयु का सत्यापन करने के लिए कहा। साथ ही युवक और युवती की आयु को देखते हुए चिंता भी जताई, कहा कि दोनों ना भावनात्मक रूप से समझदार हैं और ना ही आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। फिर भी दोनों ने लिव-इन में रहने का निर्णय लिया है। 19 वर्षीय अंजलि कुशवाह निवासी ग्वालियर और देवराज राणा निवासी चीनौर ने कोर्ट में याचिका दायर की। युवती ने बताया कि उसकी मां की मृत्यु हो गई है और सौतेली मां किसी अन्य से उसका विवाह कराना चाहती हैं। एडवोकेट हेमंत सिंह राणा ने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के युवक-युवती को शादी किए बिना साथ रहने का अधिकार है। चूंकि, अंजलि के घर का माहौल उसके लिए अनुकूल नहीं है। इसलिए वह देवराज के साथ रह रही है। उसके इस निर्णय से परिजन उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। कोर्ट ने कहा- कलेक्टर को कर्मचारी का मुख्यालय बदलने का अधिकार नहीं उच्च श्रेणी शिक्षक माखनलाल शाक्य का मुख्यालय बदलने का आदेश हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया। कलेक्टर भिंड ने उन्हें 18 अक्टूबर 2024 को निलंबित किया और 17 फरवरी 2024 को बहाल किया। बहाल करने के साथ ही कलेक्टर ने उनका मुख्यालय भी बदल दिया था। इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा- प्रभारी मंत्री से स्वीकृति मिलने के बाद ही कलेक्टर अन्य विभाग के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का तबादला कर सकता है। याची के प्रकरण में कलेक्टर भिंड संजीव श्रीवास्तव ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश दिया है।

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