मध्यप्रदेश के दमोह जिले के बिजोरी पाठा गांव में शुक्रवार दोपहर छात्रा करिश्मा लोधी (17) ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा कक्षा 12वीं में पढ़ती थी। उसके पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने मौसिया पर छेड़खानी और बदनाम करने का आरोप लगाया है। सुसाइड नोट में छात्रा ने अपने पिता से गुप्पू उर्फ गोपाल लोधी नामक अपने मौसिया को कड़ी सजा दिलाने की गुहार लगाई है। उसने लिखा है कि उसे ऐसी सजा मिले ताकि कोई भी व्यक्ति किसी बेटी को बदनाम करने से पहले सौ बार सोचे। अस्पताल पहुंचने से पहले बेटी ने दम तोड़ा छात्रा के पिता संतोष लोधी ने बताया कि वह हटा के ककराई वार्ड में पुताई का काम करने गए थे। दोपहर करीब 1:30 बजे उन्हें बेटे प्रदीप का फोन आया, जिसने बताया कि बहन ने फांसी लगा ली है। घर पहुंचने पर बेटी जमीन पर पड़ी थी और उसकी सांसें चल रही थीं। वे उसे अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने सुसाइड नोट पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शनिवार सुबह 11 बजे छात्रा का पोस्टमॉर्टम किया गया। सुसाइड नोट में आरोपी को सजा दिलाने की बात कही सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखा है, पापा मुझे माफ कर देना। हम कभी आप सबसे दूर नहीं जाना चाहते थे, लेकिन सिर्फ उस इंसान के कारण मैं यह कदम उठा रही हूं। वह इंसान है गुप्पू और मेरा मौसिया भी। छोड़ना मत पापा उसे, सजा दिलवाना। आपकी बेटी का आखिरी बार यही कहना है, ताकि कोई भी इंसान किसी भी बेटी को बदनाम करने से पहले सौ बार सोचे। ऐसा नहीं है कि उसने सिर्फ मुझे बदनाम किया, कई बार छेड़ने की भी कोशिश की, लेकिन मैं चुप रही। बहुत सपने थे मेरे पापा, लेकिन सपने ही रह गए। पापा अपना ख्याल रखना। कभी भी मेरी मम्मी को मेरी कमी महसूस मत होने देना और मेरे भाई को बहुत प्यार करना। दादा दादी अपना ख्याल रखना और मामा मामी मेरे पापा का साथ देना। मेरी मौत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ वही है। मेरे पापा का साथ दोगे कि नहीं बोलो मामा मामी। आप सबको पता है कि मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है।


