राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जब जन्म हुआ था, तभी डॉक्टर साहब (डॉ. केशव हेडगेवार) ने कहा था कि हम संघ बनाने नहीं बल्कि समाज बनाने चले हैं। यह बात संघ के अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कही। वे डेली कॉलेज में संघ की राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष की गौरवमय यात्रा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। अरुण कुमार ने कहा कि डॉक्टर साहब ने कहा कि अपने समाज के अंदर राष्ट्रभक्ति की कल्पना व भावना होनी चाहिए। डॉक्टर साहब यह प्रश्न करते थे कि आखिर यह प्रश्न ही कहां से खड़ा हो गया कि भारत में हिंदुओं का संगठन जो है, ये सांप्रदायिक है? जबकि भारत की हजारों-हजार साल की यात्रा है। यह नया राष्ट्र नहीं है। यह अंग्रेजों के आने के बाद नहीं बना। यह राष्ट्र उनका है, जिन्होंने इसे बनाने में, बनाए रखने में, इसकी रक्षा में और इसे आगे बढ़ाने में भूमिका अदा की। ये एक राष्ट्र है, सनातन राष्ट्र है, निरंतर राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि ये एक राष्ट्र है, सनातन राष्ट्र है, निरंतर राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र है। राष्ट्र किनका होना चाहिए? राष्ट्र जिनका होता है, उनके भीतर राष्ट्रभक्ति की भावना होती है। राष्ट्रभक्ति सिर्फ जय-जयकार करने में नहीं होती है, बल्कि राष्ट्रभक्ति हर पल, हर क्षण अपने राष्ट्र और समाज के लिए जीने में होती है। सब सोचें कि हम देश को क्या दे सकते हैं, मैं क्या कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष में तय किया था कि संघ को बढ़ाना है। हम सब लोगों के लिए यह आत्मचिंतन का विषय है, क्योंकि समाज ने इतना प्यार, विश्वास, सम्मान दिया है। क्या हम उसके लायक हैं? क्या हमने यह सब किया है? जो भी काम हुए हैं, वे सारे काम हमने नहीं किए हैं, बल्कि समाज के सहयोग से हुए हैं। बिना गीत संघ की कल्पना नहीं राम जन्मभूमि का आंदोलन देश के संत समाज के नेतृत्व के संभव नहीं था। सभी ने मिलकर उस काम को किया। संघ खुद श्रेय नहीं ले सकता है। संघ ने भूमिका अदा की समाज को संगठित करने, जागरूक लोगों को जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि समाज हमसे कुछ अपेक्षा भी करता है, उस पर भी हमको खरा उतरना है। आने वाले समय में हम उसका प्रयास करेंगे। उन्होंने कार्यक्रम में छात्रों द्वारा दी गई गीत-संगीत की प्रस्तुति को सराहा। कहा कि संघ में गीत कब आए, कैसे आए, कोई कह नहीं सकता, लेकिन बिना गीत के संघ की कोई कल्पना नहीं कर सकता। हमारे यहां कोई भी बैठक, कार्यक्रम, शाखा, ये बिना गीत के पूरे नहीं होते हैं।


