केंद्रीय गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के निर्देशों के बाद अक्टूबर महीने को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के तौर पर मनाया जा रहा है। इसका मकसद हर व्यक्ति को साइबर हाइजीन और साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूक करना है। जांच एजेंसियों ने जागरुकता अभियान को तीन वर्गों में बांटा है। इनमें छात्र-छात्राएं (युवा), अधिकारी-कर्मचारी और गृहिणी शामिल हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि अपराधी सबसे ज्यादा इन्हीं तीन वर्गों को टारगेट करते हैं। अभियान के तहत मप्र राज्य साइबर पुलिस ने अपने डिजीटल जीवन व डेटा को सुरक्षित रखने और साइबर हाइजीन के नियमों को समझाने के लिए एडवायजरी जारी की है। अगर ये तीन बातों का ध्यान रखा तो धोखाधड़ी से काफी हद तक बचा जा सकता है 1. व्यक्तिगत साइबर स्वच्छता: इसके तहत हर व्यक्ति को अपने मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स, ई-मेल को सुरक्षित रखने के उपाय सिखाए जा रहे हैं। ताकि वे किसी साइबर अपराध का शिकार न हों। 3. संस्थागत डेटा सुरक्षा इसके तहत सरकारी, गैर-सरकारी, शैक्षणिक संस्थानों और निजी संगठनों को अपने डेटा सेंटर, नेटवर्क सिस्टम व दफ्तर के डिजिटल संसाधनों की सुरक्षा के लिए साइबर स्वच्छता मानक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 2. डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सुरक्षा इसके तहत लोगों को यह बताया जा रहा है कि वे अपने बैंक खाते, यूपीआई एप्लिकेशन, डिजिटल वॉलेट्स आदि को साइबर धोखाधड़ी से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। जागरूकता माह में पुलिस यह भी करेगी इस जागरूकता माह के दौरान देशभर में अलग-अलग गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इनमें साइबर सुरक्षा रैली च मानव श्रृंखला निर्माण, नुक्कड़ नाटक, वर्कशॉप, सेमिनार, पोस्टर प्रतियोगिता, स्कूल-कॉलेजों में साइबर स्वच्छता शपथ, सोशल मीडिया, सिनेमा हॉल और जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रचार-प्रसार शामिल हैं।


