राजसमंद में राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के तहत सोमवार को कलेक्ट्रेट के वीसी कक्ष में मीडिया कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य मानव और वन्यजीव सहअस्तित्व में मीडिया की भूमिका को समझना और जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान ट्रेंक्यूलाइजर गन, पिंजरे, स्नेक कैचिंग स्टिक और दवाओं का प्रदर्शन किया गया। संतुलित रिपोर्टिंग का महत्व कार्यशाला को उप वन संरक्षक कस्तूरी प्रशांत सुले ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है, जिसमें मानव और वन्यजीव दोनों के हितों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि सनसनीखेज रिपोर्टिंग नुकसानदायक हो सकती है, जबकि जिम्मेदार रिपोर्टिंग संरक्षण को जन आंदोलन में बदल सकती है। वन्यजीव रेस्क्यू उपकरणों की जानकारी दी गई सहायक वन संरक्षक श्री किशन चौधरी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से वन्यजीव रेस्क्यू से जुड़ी जानकारियां साझा कीं। इस दौरान ट्रेंक्यूलाइजर गन, पिंजरे, स्नेक कैचिंग स्टिक और दवाओं का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि रेस्क्यू के दौरान इन उपकरणों का कैसे सुरक्षित और प्रभावी उपयोग किया जाता है। सनसनी से समाधान तक- मीडिया का रोल कार्यशाला का मुख्य विषय सनसनी से समाधान तक-वन्यजीव सहअस्तित्व में मीडिया की भूमिका रखा गया, जिसके तहत यह चर्चा हुई कि मीडिया जन धारणा, नीति निर्माण और संरक्षण प्रयासों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाता है। उप वन संरक्षक कस्तूरी प्रशांत सुले ने कहा कि प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है, जिसमें मानव और वन्यजीव दोनों के दृष्टिकोण शामिल हों। सनसनीखेज रिपोर्टिंग जहां नुकसान पहुंचा सकती है, वहीं जिम्मेदार रिपोर्टिंग जनजागरूकता को संरक्षण में बदल सकती है। जनजागरूकता और सहभागिता पर जोर कार्यशाला में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने, नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने और मानव-प्रकृति संबंध मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों, वन विभाग और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।


