राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ के प्राचीन जल मंदिर में सोमवार रात शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शहर की गलियों और मंदिर परिसर को सजावट और झूमर लाईटिंग से जगमगाया गया था। मंदिर का गर्भगृह, प्रवेश द्वार और आसपास की झील में रोशनी का प्रतिबिंब एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। शरद पूर्णिमा पर खीर का विशेष महत्व सुबह से ही श्रद्धालु चारमुखी शिव, भैरवनाथ और पंचमुखी हनुमान के दर्शन के लिए कतार में लगे हुए थे। शाम आठ बजे मंदिर के पट खुलते ही आरती हुई और खीर का प्रसाद वितरित किया गया। शरद पूर्णिमा पर खीर का प्रसाद विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। मंदिर परिसर में विशेष झांकियां स्थापित की गई थी। जिसमें समुद्र मंथन, शिवजी और ब्रह्मा जी की झांकियां प्रमुख थीं। यशोमती मैया और कान्हा की झांकियां सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहीं, जहां किशोरियों द्वारा छड़ी लेकर दौड़ना और कान्हा के माखन चोरी के दृश्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। अयोध्या की तर्ज पर स्थापित भगवान राम और हनुमान जी की मूर्तियों के श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मां काली और भगवान भोलेनाथ की नीले रंग में सजी मूर्तियां रात के अंधेरे में भी चमक रही थी। व्यवस्था के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे आयोजन की सफलता और सुरक्षा के लिए मंदिर समिति और प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। नरसिंहगढ़ थाना प्रभारी एस.एस. चौहान के नेतृत्व में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात रहे। भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और यातायात व्यवस्था के लिए भी अतिरिक्त बल लगाया गया था। इस आयोजन की तैयारी के लिए महंत दीपेंद्र के मार्गदर्शन में कलाकार जितेंद्र प्रजापति ‘गब्बू’ ने झांकियों और मूर्तियों को सजाया था। मंदिर समिति के अनुसार, शरद पूर्णिमा का यह दो दिवसीय उत्सव है, जिसमें श्रद्धालु दर्शन और खीर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। भक्तों की भीड़ और उत्सव की रौनक ने नरसिंहगढ़ शहर को अद्भुत और मनोहारी बना दिया।


