हाउसिंग बोर्ड ने अपनी परियोजनाओं को लेकर बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अब राज्य में बिना मांग के कोई भी आवासीय प्रोजेक्ट शुरू नहीं होगा। प्रोजेक्ट शुरू होने के तीन महीने में 30% बुकिंग हो जाने के बाद ही निर्माण के लिए टेंडर होगा। यह जानकारी वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने शुक्रवार को दी। चौधरी हाउसिंग बोर्ड छत्तीसगढ़ के 23 नवंबर को रायपुर के बीटीआई ग्राउंड पर शुरू होने जा रहे राज्य स्तरीय आवास मेले को लेकर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पहले जरूरत का आकलन किए बिना ही घर बना दिए गए। वन टाइम सेटलमेंट यानी ओटीएस लाने, छूट देने के बाद भी बड़ी संख्या में मकान नहीं बिके। हमने जब समीक्षा की तब पाया कि कुछ न कुछ पॉलिसी में गलती रही होगी। इनके नहीं बिकने के कारण बोर्ड को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब ऐसा नहीं होगा। गलतियों को देखते हुए बुकिंग पॉलिसी में बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया। अब किसी भी प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन के लिए टेंडर तब तक नहीं होगा, जब तक प्रोजेक्ट आने के तीन महीने तक हर महीने 10-10% बुकिंग न हो। इसी तरह कहीं पर प्रोजेक्ट आया और पहले ही महीने में 60% बुकिंग आ गई तो तीन महीने के पहले ही टेंडर करा दिया जाएगा। कंस्ट्रक्शन के कमीशन का खेल या जबरन निर्माण कार्य न हो अथवा बिना डिमांड निर्माण कार्य न हो, इसके लिए नीति में बड़ा परिवर्तन किया गया है। आवास मेला में 22 जिलों के लिए परियोजना हाउसिंग बोर्ड छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि मेले की तैयारी की जा रही है। यहां 22 जिलों के लिए परियोजना है। इन प्रोजेक्ट से उन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। कर्जमुक्त के बाद हाउसिंग बोर्ड की प्रगति इस प्रकार समझी जा सकती है कि कांग्रेस कार्यकाल हाउसिंग बोर्ड का बिजनेस 250 करोड़ रुपए का था। लेकिन भाजपा सरकार में एक वर्ष में 600 करोड़ का बिजनेस हुआ।


