सात साल में पूरा होगा काम:अब नदियों का पानी समुद्र में नहीं जाएगा, पीकेसी-ईआरसीपी से 21 जिलों में 4.03 लाख हेक्टेयर खेत-बागानों में होगी सिंचाई

संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) और ईआरसीपी लिंक परियोजना से आगामी 7-8 साल में प्रदेश के 21 जिलों की तकदीर बदल जाएगी। प्रोजेक्ट में कैनाल, बांध व चैनल बनने में 80 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसका 90% हिस्सा केंद्र देगा। इससे 4.03 लाख हेक्टेयर जमीन पर बगीचे व फसलों की सिंचाई होगी। इसमें से 2.51 लाख हेक्टेयर नया सिंचित क्षेत्र विकसित कर माइक्रो इरिगेशन से फसलों व बागों की सिंचाई होगी। साथ ही 1.52 लाख हेक्टेयर पुराने सिंचित क्षेत्र को ज्यादा पानी मिलेगा। इन जिलों के 3.25 करोड़ लोगों को पेयजल मिलेगा। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ ही अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी पानी मिलेगी। पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राजस्थान-मध्यप्रदेश के बीच हुए एमओए के बाद अब काम में तेजी आएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राजस्थान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के बीच हो चुका एमओए मानसून के दौरान चंबल नदी के सहायक नदी (कुन्नू, कूल, पार्वती, कालीसिंध, मेज) में आना वाला बारिश का पानी बह कर समुद्र में चला जाता है। ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) प्रोजेक्ट में इस जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, पार्वती, कालीसिंध, गंभीर सहित अन्य नदी बेसिनों के पानी को डायवर्ट किया जाएगा, ताकि बाढ़ प्रबंधन के साथ ही राज्य के सूखा ग्रस्त क्षेत्र में आम जल को पेयजल, सिंचाई व उद्योगों के लिए पानी मिल सके। गांवों में बढ़ेगा ईको टूरिज्म कृषि वैज्ञानिकों से वर्ष 2050 तक फल-सब्जी की मांग को देखते हुए रिसर्च का रोडमैप तैयार करवाया जा रहा है। इसका केंद्र पूर्वी राजस्थान है। सकल घरेलू उत्पादन में बागवानी फसलों की हिस्सेदारी 30% है। बागवानी आधारित ईको टूरिज्म पर भी फोकस है। कृषि क्षेत्र की रिसर्च को लैब से लैंड तक पहुंचाने की पहल की जा रही है। ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सकेगी। डीपीआर बनी, 80 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट राजस्थान व मप्र ने डीपीआर बना ली है। राजस्थान की डीपीआर वेप्कोस ने तैयार की है। इसकी अनुमानित लागत 80 हजार करोड़ है। पहले यह प्रोजेक्ट 37 हजार करोड़ का था। अब केंद्रीय कैबिनेट से फंड आवंटित होगा। जल शक्ति मंत्रालय पानी के आवंटन व अकाउंटिंग के लिए निकाय भी बनाएगा। दोनों राज्य अपने क्षेत्र में होने वाले खर्च की 10% राशि देंगे। दोनों को कुनो व पार्वती बेसिन में 75% निर्भरता तक जल दोहन कर सकेंगे। योजना से राज्य को 4102 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर्स) पानी उपलब्ध होगा। ये है प्रोजेक्ट पीकेसी से राजस्थान में होगा यह काम 1. नदी पर रामगढ़ बैराज 2. पार्वती नदी पर महलपुर बैराज 3. कालीसिंध नदी पर नवनेरा बैराज 4. मेज नदी पर मेज बैराज 5. बनास नदी पर डूंगरी बांध 6. रामगढ़ बैराज से डूंगरी बांध तक पानी ट्रांसफर सिस्टम 7. ईसरदा बांध व पूर्वनिर्मित 26 बांधों का पुनरुद्वार गांवों में बढ़ेगा ईको टूरिज्म पूर्वी राजस्थान के साथ ही प्रदेशभर में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों से वर्ष 2050 तक फल-सब्जी की मांग को देखते हुए रिसर्च का रोडमैप तैयार करवाया जा रहा है। इसका केंद्र पूर्वी राजस्थान के जिले रहेंगे। सकल घरेलू उत्पादन में बागवानी फसलों की हिस्सेदारी 30% है। साथ ही बागवानी आधारित ईको टूरिज्म पर भी फोकस करने की प्लानिंग है। कृषि क्षेत्र की रिसर्च को लैब से लैंड तक पहुंचाने की पहल की जा रही है, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सकेगी। इसके लिए केंद्र व राज्य की अनुदान वाली योजनाओं के बारे में भी किसानों को जानकारी दी जाएगी। इस पानी से ज्यादा से ज्यादा खेतों में माइक्रो इरिगेशन, ग्रीन हाउस व अन्य आधुनिक तकनीक का उपयोग कर फसल बुआई की प्लानिंग की जाएगी, ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ही किसानों की आय भी बढ़े।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *