भास्कर एक्सक्लूिसव बोकारो जिले में लगभग 12 वर्ष पहले मरीजों की क्षमता को ध्यान में रखकर 100 बेड की क्षमता वाला सदर अस्पताल बोकारो का निर्माण कराया गया था। जिस समय सदर अस्पताल बनकर चालू हुआ, उस समय बोकारो की आबादी लगभग 17 लाख थी। लेकिन आज आबादी बढ़कर लगभग 26 लाख हो गई है। बावजूद यहां बेड की क्षमता नहीं बढ़ाई गई। जबकि उस समय के अनुपात में आबादी लगभग 10 लाख और बढ़ गई है। ऐसे में सदर अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। आलम यह है कि 100 बेड वाले सदर अस्पताल में अब अन्य मरीजों के लिए जगह ही नहीं बचा है। सभी 100 बेड फुल हैं, इसके कारण मरीजों का इलाज बरामद में अतिरिक्त बेड लगाकर किया जा रहा है। यहां वार्डों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 100 से बढ़ गई है, जबकि ओपीडी में हर दिन 350 से 550 मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन आज तक ना तो कोई नया वार्ड बना और ना ही ओपीडी हॉल का ही विस्तार हो सका और ना ही बेड की संख्या बढ़ाई गई। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण उनको वार्ड के बजाय बरामदा में रखा जा रहा है। ठंड के मौसम में मरीजों को बरामदा में रखने के कारण अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे मरीज के परिजन भी परेशान हैं। महिला वार्ड में भी मरीज बढ़े, यहां भी बेड की कमी महिला वार्ड में मरीजों को संख्या काफी अधिक होने के कारण अब उन्हें सामान्य वार्ड में मरीजों के साथ रखा जा रहा है। चूंकि मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद बरामदा में जितनी क्षमता थी, वह भी भर गई है। इसके बाद मरीजों को पुरूषों के साथ ही समान्य व बुजुर्ग वार्ड में रखा रहा है। जिनको पानी चढ़ाने की आवश्यकता होती है, वैसे मरीजों को इमरजेंसी में पानी चढ़ाकर व दवा देकर घर भेज दिया जा रहा है। सीसीयू में बनाया जा रहा है इसका विकल्प : उपाधीक्षक तत्कालीन डीएस व सीएस ने वार्डों की संख्या बढ़ाने के लिए भेजा था प्रस्ताव सदर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए तत्कालीन उपाaधीक्षक ने करीब ढाई वर्ष पहले ही तत्कालीन सिविल सर्जन को बेड बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसके आलोक में तत्कालीन सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य मंत्रालय को सदर अस्पताल के पीछे में ही सेंकेंड फ्लोर के उपर एक फ्लोर और बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन उस समय के तत्कालीन सिविल सर्जन और उपाधीक्षक के स्थानांतरण होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। जब तक नया कोई वार्ड नहीं बन जाता है, तब तक सदर अस्पताल में मरीजों का बरामद में ही इलाज होगा। वार्ड फूल रहने से बरामदे में रखे गए मरीज।


