झारखंड में 2023 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन योजना) के तहत अभी तक मात्र 1.8 प्रतिशत ही आवास बन सके हैं। राज्य के 11 जिले ऐसे हैं, जहां एक भी आवास का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस योजना के लिए 23,224 लाभुकों को योग्य पाया गया। इनमें से 19,078 का रजिस्ट्रेशन हुआ। स्वीकृत हुए 16,178 आवास। इन आवासों में से अबतक 298 (1.8%) का ही निर्माण पूरा हो सका है। कुल स्वीकृत लाभुकों में से 3797 को अभी तक पहली किस्त का भी भुगतान नहीं हुआ है। जिन 11 जिलों में एक भी आवास पूरे नहीं हुए हैं, उनमें बोकारो, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गुमला, जामताड़ा, खूंटी, रामगढ़, रांची, सरायकेला-खरसांवा और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं। आठ जिलों मंे बनाने हैं एक हजार से ज्यादा आवास पाकुड़ जिले में सबसे ज्यादा 4626 लाभुक आवास के योग्य पाए गए। इनमें से 3450 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। जबकि, वहां 2913 आवास स्वीकृत हुए हैं। वैसे आठ जिले ऐसे हैं जहां एक हजार से ज्यादा आवास सेक्शन हुए हैं। इन जिलों में साहिबगंज में 2726 लाभुकों का रजिस्ट्रेशन और 2402 लाभुकों का सेंक्शन किया गया था। इसी तरह से गढ़वा में 2770 का रजिस्ट्रेशन और 2302 का सेंक्शन, गोड्डा में 2003 का रजिस्ट्रेशन और 1410 लाभुकों का सेंक्शन, पूर्वी सिंहभूम में 1152 का रजिस्ट्रेशन और 968 लाभुकों का सेंक्शन, पलामू में 1844 का रजिस्ट्रेशन और 1706 लाभुकों का सेंक्शन, दुमका में 1727 का रजिस्ट्रेशन और 1043 लाभुकों का सेंक्शन और गुमला में 1194 का रजिस्ट्रेशन और 1043 लाभुकों का आवास सेंक्शन किया गया था। पीएम मोदी ने खूंटी से की थी योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) योजना का शुभारंभ खूंटी जिले से किया था। इस योजना के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के द्वारा पक्का आवास का निर्माण किया जा रहा है। वैसे पीवीटीजी जो सरकारी नौकरी में नहीं हैं और कच्चा मकान मंे रहते हैं, उन्हें पक्का आवास बनाने के लिए दो लाख रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। योजना के अंतर्गत कम से कम 25 वर्ग मीटर में पक्का आवास का निर्माण किया जाना है। 13 महीने पहले देर से शुरू हुई योजना, आचार संहिता से प्रभावित हुआ काम विभागीय अफसरों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के नवंबर में योजना की शुुरुआत की। अगले चार माह तक कोई खास काम नहीं हुआ। इपर लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लग गया। इतना ही नहीं इस योजना के तहत विभाग के अफसरों को सर्वे कराना था। जिसके तहत अगर किसी मोहल्ला या टोले में सर्वे होने के बाद योग्य पाए गए लाभुकों का वेरिफिकेशन भी करना था, ताकि सरकारी नौकरीवाले लाभ न ले सकें। जब संबंधित मोहल्ला, टोला या पंचायत को सारी प्रक्रिया के बाद फ्रिज (क्लोज)कर दिया जाता है। उसके बाद ही वहां के लाभुकों की राशि मांगी जा सकती है। इन प्रक्रियाओं में काफी समय लगने की वजह से योजना में धरातल पर काम करने में विलंब हुआ।


