AAP से गठबंधन का ज्यादा फायदा कांग्रेस को हुआ:चंडीगढ़ में 10 साल बाद सांसद बनाया; सुप्रीम कोर्ट तक लड़कर AAP सिर्फ एक बार मेयर बना सकी

चंडीगढ़ में 29 जनवरी को मेयर चुनाव की वोटिंग होगी। इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रही है। देश में बने विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक के चलते 2024 में दोनों पार्टियां साथ आईं थीं। हालांकि इस गठबंधन से AAP के मुकाबले कांग्रेस ज्यादा फायदे में रही। AAP की मदद से कांग्रेस ने न केवल 10 साल बाद चंडीगढ़ में अपना सांसद बनवा लिया बल्कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भी अपने बनाए। AAP एक बार जरूर मेयर की कुर्सी तक पहुंची लेकिन उसके लिए भी सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा। यही वजह है कि इस बार AAP ने कांग्रेस की चालाकी देख गठबंधन तोड़ लिया। बहुमत न होने के बावजूद दोनों पार्टियों ने अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे हैं। हालांकि दोनों के पास अभी भी एक-दूसरे का समर्थन करने का विकल्प मौजूद है। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा के लिए जरूर बड़ा झटका हो सकता है। मेयर तो बना लिया, लेकिन गलती से कांग्रेस हारी 2021 के दिसंबर में हुए निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी 35 में से 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। 12 पार्षदों के साथ बीजेपी दूसरे, आठ पार्षदों के साथ कांग्रेस तीसरे और एक पार्षद के साथ शिरोमणि अकाली दल चौथे नंबर पर रही। लेकिन 2022 और 2023 में बड़ा दल होने के बावजूद आम आदमी पार्टी मेयर नहीं बना पाई, जिससे नेताओं में मायूसी थी। इसी बीच 2023 में दिल्ली में INDIA ब्लॉक के तहत कांग्रेस और आम आदमी पार्टी साथ आ गईं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले चंडीगढ़ मेयर चुनाव था। ऐसे में INDIA ब्लॉक के फार्मूले के तहत कांग्रेस और आप गठबंधन में मैदान में उतरीं। 2 वर्षों में कुछ पार्षदों के दल बदलने के बाद भी AAP+कांग्रेस के पास 20 वोट थे, जबकि बीजेपी के पास 15 वोट थे। इससे गठबंधन की जीत पक्की थी। लेकिन यह चुनाव बहुत ड्रामेटिक रहा। 18 जनवरी 2024 को जैसे ही चुनाव की तारीख आई, तो चुनाव के प्रिजाइडिंग अफसर अनिल मसीह अस्पताल में भर्ती हो गए। इसके बाद प्रशासन ने चुनाव रद्द करने का फैसला लिया और अगली तारीख 6 फरवरी घोषित कर दी। गठबंधन ने इसका विरोध किया और मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। कोर्ट के आदेश पर 30 जनवरी को चुनाव हुए। गठबंधन के पास 13(AAP) और 7(कांग्रेस) वोट थे, लेकिन चुनाव अधिकारी अनिल मसीह ने वोटिंग के दौरान गठबंधन के 8 वोट इनवैलिड कर दिए। बीजेपी के मनोज सोनकर को 16 वोट मिले, जिनमें एक वोट शिरोमणि अकाली दल का था। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर पद बीजेपी के खाते में गया। सीनियर डिप्टी मेयर पद पर गठबंधन से गुरप्रीत गाबी का मुकाबला बीजेपी के कुलजीत सिंह सिद्धू से था, जबकि डिप्टी मेयर पद पर कांग्रेस की निर्मला देवी का मुकाबला बीजेपी के राजिंदर सिंह से था। लेकिन मेयर पद पर हार के बाद गठबंधन ने वॉकआउट कर दिया, यहीं गलती कांग्रेस पर भारी पड़ गई। जिसके चलते दोनों पदों पर बीजेपी की जीत हुई। हालांकि बैलेट पर कुछ लिखते हुए अनिल मसीह का वीडियो वायरल हो गया, जो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले रात साढ़े नौ बजे नाटकीय तरीके से मेयर सोनकर ने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले दिन में बीजेपी की पार्षद पूनम, नेहा और गुरचरणजीत बीजेपी में शामिल हो गईं। 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला बदलते हुए आम आदमी पार्टी को कुलदीप कुमार के रूप में पहला मेयर दिलाया। हालांकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर बीजेपी के ही रहे, क्योंकि गठबंधन के पार्षदों ने वॉकआउट किया था, जबकि मतदान सही तरीके से हुआ था। गठबंधन का फायदा उठाकर कांग्रेस ने सांसद बनाया इसके बाद लोकसभा चुनाव हुए। INDIA ब्लॉक के फार्मूले के तहत कांग्रेस और AAP ने मिलकर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने मनीष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। BJP ने तब की सांसद किरण खेर की जगह लोकल चेहरे संजय टंडन पर दांव खेला। पार्टी को उम्मीद थी कि वह सीट निकाल सकते हैं, क्योंकि उनका आधार चंडीगढ़ समेत पंजाब में अच्छा था। गठबंधन के उम्मीदवार मनीष तिवारी के समर्थन में केजरीवाल से लेकर कई बड़े नेता प्रचार के लिए पहुंचे। मेयर चुनाव में जो कुछ हुआ था, उसे गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में पूरी तरह भुनाया। नतीजतन दस साल बाद कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी 2504 वोटों से जीत गए, जबकि संजय टंडन को हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले कांग्रेस इसलिए लोकसभा चुनाव हार रही थी क्योंकि AAP अपना उम्मीदवार उतार रही थी। कांग्रेस सीनियर व डिप्टी मेयर बनाने में कामयाब रही
जैसे ही 2025 में मेयर चुनाव की बारी आई तो सीट महिला आरक्षित थी। इंडिया गठबंधन को उम्मीद थी कि वह सीट निकाल लेगा। लेकिन बीजेपी के लिए चुनौती कम नहीं थी। सांसद की वोट कांग्रेस के पास थी। ऐसे में बीजेपी ने पूरी रणनीति के तहत 2022 में कांग्रेस से बगावत कर पार्टी छोड़ने वाले दविंदर बबला की पत्नी हरप्रीत कौर बबला को मेयर का उम्मीदवार बनाया। बीजेपी के पास 16 पार्षद थे और गठबंधन के पास 20 वोट थे। लेकिन चुनाव से ठीक तीन दिन पहले बीजेपी ने कांग्रेस के किले में सेंध लगा दी। 27 जनवरी को पार्षद गुरबख्श रावत को बीजेपी में शामिल कर लिया गया। इसके बावजूद गठबंधन के पास बहुमत था। चुनाव से एक दिन पहले AAP के मेयर कुलदीप और उनके साले पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ। लेकिन अंदर खाते कुछ और गेम पक रही थी। 30 जनवरी को हुए चुनाव में बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला मेयर बनीं। उन्हें 19 वोट मिले। तीन पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की। गठबंधन की AAP पार्षद प्रेम लता को 17 वोट मिले। जबकि सीनियर डिप्टी मेयर पद पर कांग्रेस पार्षद जसबीर सिंह बंटी 19 वोट लेकर जीते, जबकि बीजेपी की बिमला दुबे को 17 वोट मिले। डिप्टी मेयर पद पर भी कांग्रेस पार्षद तरुणा मेहता 19 मत लेकर विजयी रहीं। ऐसे में कांग्रेस पर धोखा देने के आरोप लगे। 2026 में पहली बार तीनों दलों ने उम्मीदवार उतारे
2026 में AAP ने कांग्रेस से गठबंधन तोड़ दिया। उन्होंने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। इस बार मेयर चुनाव थोड़ा अलग है, क्योंकि इस बार चुनाव सीक्रेट वोटिंग के जरिए होना है। बीजेपी ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पहले कांग्रेस नेताओं ने गठबंधन के संकेत दिए, लेकिन दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई। दोनों दलों के बीच जुबानी तीर भी चले। आखिरकार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस बार अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। इसकी वजह चाहे जो भी बताई जाए, लेकिन दोनों दलों की नजर पंजाब में आने वाले नगर निगम और विधानसभा चुनावों पर है। पंजाब कांग्रेस इकाई के नेता शुरू से ही गठबंधन का विरोध कर रहे थे। इस बार AAP की पार्षद सुमन शर्मा बीजेपी में शामिल हो गईं। इसी बीच उनकी भाभी पर मोहाली में पर्चा दर्ज हुआ। आरोप है कि वह ड्यूटी पर नहीं जाती थीं, लेकिन वेतन ले रही थीं। इस टर्म में चंडीगढ़ में पहली बार तीनों दलों ने नामांकन किया है। हालांकि माना जा रहा है कि कांग्रेस मेयर पद से और आम आदमी पार्टी सीनियर डिप्टी व डिप्टी मेयर पद से नामांकन वापस ले सकती हैं और एक-दूसरे के उम्मीदवारों को वोट देंगी। इस समय बीजेपी के पास 18 वोट हैं। अगर AAP और कांग्रेस एक-दूसरे का समर्थन करती हैं, तो उनके पास 17 पार्षदों और एक सांसद का वोट मिलाकर 18 वोट हो जाएंगे। ऐसे में अगर मुकाबला टाई रहा, तो पर्ची से चुनाव का फैसला होगा। ——————— सबसे बड़ी पार्टी AAP, एक ही बार मेयर बना पाई:सुप्रीम कोर्ट तक लड़ना पड़ा; चंडीगढ़ निगम में BJP को कांग्रेस-क्रॉस वोटिंग का साथ मिलता रहा 2021 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने धमाकेदार एंट्री की थी। AAP ने 35 में से 14 वार्डों में चुनाव जीत लिया। वह निगम हाउस की सबसे बड़ी पार्टी बनी। दूसरे नंबर पर 12 पार्षदों के साथ भाजपा और 8 पार्षदों के साथ कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। पढ़ें पूरी खबर…
—————– चंडीगढ़ में हर साल नया मेयर क्यों:जिस पंजाब का नगर निगम एक्ट अडॉप्ट किया, वहां 5 साल का टेन्योर; इस बार वोटिंग भी नए तरीके से चंडीगढ़ में 29 जनवरी को नगर निगम का नया मेयर चुना जाएगा। पंजाब-हरियाणा और देश के दूसरे राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुकाबले चंडीगढ़ मेयर का चुनाव अलग है। यहां पार्षद तो 5 साल के लिए चुने जाते हैं। लेकिन मेयर हर साल नया चुना जाता है। इस बार 5वीं और मौजूदा पार्षदों की आखिरी टर्म का मेयर चुना जाएगा। पढ़ें पूरी खबर …

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