ब्यावर विधायक की बेटी के फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से तहसीलदार बनने की शिकायत करने वाले व्यक्ति पर बदमाशों ने हमला कर दिया। कोर्ट से निकलकर बहन के घर जाते समय स्कूटी व बाइक पर आए करीब पांच बदमाशों ने रास्ते में रोककर मारपीट की। स्कूटी वहीं छोड़कर बचने के लिए बिल्डिंग की तरफ दौड़े, लेकिन बदमाशों ने पकड़कर सड़क पर गिरा दिया। इसके बाद लोहे के पाइप और रॉड से हमला किया और लात-घूंसे मारे। चिल्लाने की आवाज सुनकर लोगों के आने पर आरोपी फरार हो गए। पीड़ित व्यक्ति ने विधायक की बेटी के खिलाफ व अवैध काम करने वालों की शिकायत करने पर हमले की आशंका जताई है। घटना ब्यावर के साकेत नगर थाना क्षेत्र में 23 नवंबर को हुई, जिसका वीडियो भी सामने आया है। पहले घटना की ये तस्वीरें देखें … 1. बाइक और स्कूटी पर आए बदमाशों ने व्यक्ति को रास्ता रोककर थप्पड़ मारा। 2. व्यक्ति के साथ पाइप और हाथों से मारपीट की गई। 3. फनीस बचने के लिए बिल्डिंग की तरफ दौड़ा, लेकिन बदमाशों ने पकड़ लिया और मारपीट की। 4. बदमाश काफी देर तक व्यक्ति के साथ लात-घूंसों और पाइप से मारपीट करते रहे। लोगों आने पर फरार हो गए। पुलिस ने हमले के पांच आरोपियों को पकड़ा साकेत नगर थाने के थानाधिकारी जितेंद्र फौजदार ने बताया – साकेत नगर निवासी फनीस कुमार सोनी (53) पुत्र कंवरलाल सोनी पर हमले की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। हमला करने के आरोप में मसूदा रोड निवासी मोहम्मद कैफ (21), आर के होटल के पीछे रहने वाला सौरभ किराड़िया (22), शिव गंगा कॉलोनी निवासी मुकुल आनंद रावत (25), गांव अतितमंड निवासी कमल किशोर लोहार (30) और बिल्लियों का बाड़िया निवासी ओमप्रकाश रावत (25) को पकड़ा गया है। आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपी मुकुल आनंद पर पहले से 10 से अधिक मामले दर्ज हैं और कमल किशोर लोहार पर भी कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। बहन के घर जाते समय किया हमला फनीस कुमार सोनी ने बताया – 24 नवंबर को सुबह 11 बजे ADJ कोर्ट में एक परिवाद में पेश होने गया था। वहां करीब 3 बजे वीरेंद्र सिंह रावत दिखाई दिया, जो विधायक शंकर सिंह रावत का मैनेजर है। लगभग 3:30 बजे कोर्ट से बाहर निकलते ही वीरेंद्र ने कुछ लोगों को इशारा किया। मैं बहन के घर साकेत नगर जाने के लिए निकला था। इसी दौरान ब्रह्मानंद मार्ग पर 8 ड्रीम्स बिल्डिंग के सामने पहले बाइक पर आए दो बदमाशों ने रोक लिया। इतनी ही देर में स्कूटी पर पीछे से तीन बदमाश और आ आए। बाइक सवार बदमाशों ने अचानक हमला कर मारपीट शुरू कर दी। बचने के लिए मैं स्कूटी को छोड़कर बिल्डिंग की ओर भागा, लेकिन बदमाशों ने पकड़ लिया। सड़क पर गिराकर पर रॉड व लोहे के पाइप से मारपीट की। चिल्लाने पर लोग जुटे तो आरोपी भाग गए। दो साल में ही पहले फिटनेस और फिर दिव्यांग सर्टिफिकेट लिया फनीस ने बताया – विधायक शंकर सिंह रावत की बेटी कंचन चौहान ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र लगाकर तहसीलदार की नौकरी हासिल की थी। इससे पहले कंचन महिला अधिकारिता विभाग में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थी। इस मामले में RTI के माध्यम से PMO से जानकारी मांगी गई थी। कंचन चौहान के दिव्यांग प्रमाणपत्र और पहले जारी फिटनेस प्रमाणपत्र की कॉपी मांगी गई थी। सुपरवाइजर के पद पर रहते समय कंचन पूरी तरह फिट थीं और इसी नौकरी से इस्तीफा देकर तहसीलदार का पद ज्वॉइन किया था। शिकायत के बाद जब दोबारा मेडिकल परीक्षण कराया गया, तो फर्जीवाड़ा सामने आया। फनीस ने बताया-पिछले दो साल में इस मामले को लेकर उन पर कई बार हमले हो चुके हैं। शिकायतों के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह पहला मौका है जब घटना कैमरे में कैद हुई। हर बार सुनसान जगह पर प्लान कर मारपीट की जाती थी। फनीस ने कहा-संभवतया: इसी मामले को लेकर उस पर हमला किया गया है। अवैध कब्जे करने वालों की शिकायत और मामले उठाने पर भी हमले की आशंका है। इस मामले में ब्यावर विधायक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। क्या है पूरा फर्जी सर्टिफिकेट मामला बता दें, भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत (ब्यावर) की बेटी कंचन चौहान ने RAS भर्ती में 40% से अधिक विकलांगता कैटेगरी का प्रमाणपत्र लगाया था। फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट को लेकर CM पोर्टल पर शिकायत की गई, जिसके बाद SOG में परिवाद दर्ज हुआ। 3 सितंबर 2024 को मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया, लेकिन वे नहीं आईं। बाद में 14 अक्टूबर 2024 को SMS मेडिकल बोर्ड की जांच में पाया गया कि कंचन को एक कान से सुनने में कोई समस्या नहीं और दूसरे कान की परेशानी 8% विकलांगता के बराबर है। जबकि, विकलांग कोटे में नौकरी पाने के लिए 40% तक दिव्यांग होना जरूरी है।


