अलवर के इंदिरा गांधी स्टेडियम में चल रहे “नॉव योर आर्मी” मेले के दूसरे दिन, ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए हथियारों और सिस्टम की विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। स्कूली बच्चों और नागरिकों ने सेना की ताकत और तकनीक को करीब से देखा। प्रदर्शनी में हवाई हमलों और ड्रोन को गिराने वाले तीन मुख्य हथियारों की जानकारी दी गई। सेना ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में USFM रडार सिस्टम बेहद कारगर साबित हुआ था, जो 32 किलोमीटर तक के क्षेत्र में दुश्मन के हवाई हमले, ड्रोन और लो-फ्लाइंग ऑब्जेक्ट की लोकेशन देता है। इस रडार सिस्टम द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लाइट फील्ड गन और L-70 गन को निर्देशित किया जाता है, जो लक्ष्य को मार गिराती हैं। लाइट फील्ड गन और L-70 गन
ये दोनों हथियार दुश्मन के ड्रोन और हवाई हमलों को रोकने और नष्ट करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। सेना के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर में इन दोनों दुश्मन के ड्रोन को मारने में गनों ने महत्वपूर्ण काम किया था। मोब मास्ट 30M: 40 किलोमीटर तक दुश्मन की हर मूवमेंट पकड़ता है
इसके अलावा फ्रांस में बना मोब मास्ट 30M भी प्रदर्शनी में दिखाया गया। यह सिस्टम 42 किलोमीटर के एरिया में दुश्मन की हर मूवमेंट-जैसे टैंक, गन और किसी भी एक्टिविटी पर नजर रखता है। गाइडर अमित तोमर ने बताया कि यह रडार को ऊंचाई देने का काम करता है, जिससे दूर बैठकर 40 किलोमीटर तक दुश्मन की किसी भी हरकत को डिटेक्ट कर उसे नष्ट किया जा सकता है। यह हाइड्रोलिक सिस्टम है और ऑपरेशन सिंदूर में बॉर्डर इलाकों में खासतौर पर उपयोगी रहा। ड्रोन सिस्टम
1 से 5 KG तक बारूद ले जाने की क्षमता सेना ने अलग-अलग ड्रोन सिस्टम की प्रदर्शनी भी लगाई।ये ड्रोन 1 KG से लेकर 5 KG तक बारुद उठाकर दुश्मन क्षेत्र में छोड़ सकते हैं और वापस लौट आते हैं। 1 KG वाला ड्रोन सुसाइड मिशन के लिए भी बनाया गया है, जो बारूद लेकर खुद ही ब्लास्ट हो सकता है।ऑपरेशन सिंदूर में ये ड्रोन सिस्टम भी विशेष रूप से काम आए थे। बच्चों में हथियार देखने की होड़
मेले में स्कूली बच्चों ने हथियारों को हाथ में लेकर देखने और फोटो खिंचवाने में खूब उत्साह दिखाया। 10 साल के भावेश ने बताया कि हथियारों का वजन काफी ज्यादा होता है और यहां आर्मी के अधिकारी उन्हें हर गन का तरीका समझा रहे हैं। जवानों के बाइक स्टंट रहे आकर्षण का केंद्र
मेले में जवानों ने मोटरसाइकिल पर कई स्टंट दिखाए कभी योगा करते हुए, कभी हाथ छोड़कर, तो कभी अलग-अलग फॉर्मेशन में। अंत में सभी जवान तिरंगा लेकर बाइक पर सलामी देने पहुंचे, जिसने लोगों का ध्यान खींचा।


