मऊगंज जिले के नईगढ़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक संविदा कर्मचारी का गीत सामने आया है। इस गीत के माध्यम से प्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण की वर्षों पुरानी मांग को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। नईगढ़ी सीएससी स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में प्रवर्तक के पद पर कार्यरत आशीष खरे ने यह गीत गाया है। इसमें संविदा कर्मचारियों की असुरक्षा, संघर्ष और भविष्य को लेकर चिंताओं को मार्मिक शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। गीत में आशीष खरे ने संविदा व्यवस्था को “कलंक” बताते हुए इसे समाप्त करने और कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई है। गीत के बोल सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधित हैं, जिन्हें उन्होंने “मोहन जीजा” कहकर पुकारा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को “मामा” कहकर संबोधित करना भी श्रोताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। गीत के माध्यम से स्थायी नियुक्ति के साथ पेंशन, बीमा और आयुष्मान जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी मांग की गई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की पीड़ा को दर्शाया गया है, जो बीमारों की सेवा करते हुए भी स्वयं बीमारी और असुरक्षा के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार के दो साल पूरे होने पर गया गीत यह गीत ऐसे समय में सामने आया है जब मोहन सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर प्रदेशभर में सरकार की उपलब्धियों को लेकर प्रेस वार्ताएं हो रही हैं। संविदा कर्मचारी की यह अपील सरकार और प्रशासन के लिए एक भावनात्मक संदेश बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर लोग इस गीत से खुद को जोड़ते हुए इसे संविदा कर्मचारियों की आवाज़ बता रहे हैं। गीत के बोल- करलो मोहन जीजा जी, विनती ये स्वीकार,
परमानेनट करा दो आपकी होगी जयजयकार, संविदा कलंक है ये इसको मिटाओ,
रेगुलर करा दो हमको अब न सताओ, पेंसन बीमा सब कुछ के हम भी है हकदार,
परमानेनट करा दो आपकी,,,, बीमारो के बीच ही है सेवा हमारी,
जाने कब लग जाए कौन बीमारी, आयुष्मान दिलाओ गर हम हो गए बीमार,
परमानेनट करा दो आपकी,,,,


