छत्तीसगढ़ के चर्चित घोटालों से जुड़े आरोपियों के लिए बुधवार अहम दिन रहा। रायपुर की अदालत में कस्टम मिलिंग, DMF मामले में जमानत पर सुनवाई हुई। शराब घोटाला मामले में रायपुर की जेल में बंद पूर्व मंत्री कवासी लखमा से EOW के अफसर पूछताछ के लिए पहुंचे थे। करीब 3 से 4 घंटे इनसे पूछताछ चली, मगर अधिकारियों के हाथ कुछ खास नहीं लगा। अदालत में कस्टम मिलिंग मामले में रोशन चंद्राकर की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। DMF घोटाला मामले में रानू साहू की जमानत याचिका भी खारिज की गई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले में कहा कि DMF केस में पहले से ही रायपुर की जेल में बंद रानू साहू, सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी, माया वारियर, मनोज द्विवेदी को 2 अप्रैल तक न्यायिक रिमांड पर ही रखा जाएगा। यानी कि इससे पहले इनके जेल से बाहर आने की संभावना नहीं है। जेल में रही गहमा-गहमी
रायपुर की जेल में बुधवार के गहमा-गहमी का माहौल रहा। दरअसल यहां ED के शराब घोटाला केस में पूर्व मंत्री कवासी लखमा बंद हैं। इनसे मिलने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट पहुंचे थे। इसी वक्त EOW के अधिकारी भी पूछताछ के लिए लखमा से मिलने गए थे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक शराब घोटाले में सरकारी ऑर्डर जारी करने, कमिशन का इस्तेमाल, पैसे किस तरीके से लिए जाते थे, किसे दिए जाते थे, अफसरों का क्या रोल था, मंत्री का क्या रोल था इस तरह के सवाल लखमा से पूछे गए। ज्यादातर जवाब में लखमा पता नहीं-भूल गया ही कहते रहे। 12 बजे जेल में घुसे EOW के अफसर शाम 5 बजे के आस-पास बाहर आए। ईओडब्ल्यू की टीम को 19 और 20 मार्च को पूछताछ की इजाजत मिली है। 20 को फिर से पूछताछ के लिए टीम जा सकती है। जानिए क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला
ED ने कस्टम मिलिंग स्कैम में मार्कफेड के पूर्व MD मनोज सोनी सहित 5 पर FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि 140 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की गई। इसमें अफसरों से लेकर मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तक शामिल हैं।
अलग-अलग राइस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता है। इस प्रकिया में भ्रष्टाचार कर प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध राशि की वसूली की गई। जांच में पता चला है कि एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर लेवी वसूलते और अफसरों को जानकारी देते। जिनसे रुपए नहीं मिलते उनका भुगतान रोक दिया जाता। DMF घोटाला क्या है
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। केस में यह तथ्य निकाल कर सामने आए हैं कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता पाई गई। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ED की जांच के बाद अब EOW की टीम अपनी जांच तेज कर दी है।
ED की जांच ने DMF घोटाले के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। इसमें यह बात सामने आई है कि ठेकेदारों के बैंक खाते में जमा की गई रुपए का बड़ा हिस्सा ठेकेदारों ने सीधे कैश में निकाल लिया है। जांच के दौरान ED ने ठेकेदारों, सरकारी और उनके सहयोगियों के अगल-अगल ठिकानों पर रेड मारी थी। क्या है शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है।


