आईएएस संतोष वर्मा से जुड़े मामले में एक और कड़ी जुड़ गई है। वर्मा को प्रमोशन से जुड़े केस में बरी दिखाने का फर्जी आदेश देने वाले निलंबित जज और उसे टाइप करने वाले बाबू को जमानत देने वाले अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे) प्रकाश कसेर का ट्रांसफर कर दिया गया है। एडीजे कसेर को इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय से सीधी जिले के रामपुर तहसील कोर्ट भेजा गया है। बीते एक माह में उन्होंने इस हाई-प्रोफाइल केस से जुड़े दो आरोपियों को राहत दी थी। पहले उन्होंने निलंबित एडीजे विजेंद्र सिंह रावत को अग्रिम जमानत दी, जिन पर संतोष वर्मा को बरी करने का फर्जी आदेश तैयार कराने का आरोप है। इसके बाद इसी मामले में रावत की कोर्ट में पदस्थ रहे बाबू नीतू सिंह को भी जमानत दी गई। नीतू सिंह को पुलिस ने 18 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। मजिस्ट्रेट ने उसे 20 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा था। रिमांड अवधि के दौरान ही नीतू ने जमानत अर्जी लगाई। पुलिस ने रिमांड का हवाला देकर केस डायरी पेश नहीं की, इसके बावजूद एडीजे कसेर ने सुनवाई कर जमानत दे दी। बाबू को रिमांड अवधि में ही जमानत दे दी थी
जमानत आदेश में एडीजे कसेर ने उल्लेख किया कि पुलिस की यह धारणा गलत है कि रिमांड अवधि में जमानत नहीं दी जा सकती। आदेश में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी आरोपी को जमानत अर्जी दायर करने के हक से वंचित नहीं किया जा सकता।


