IPS कैडर रिव्यू मामला- CAT ने केंद्र-राज्य को दिया आदेश:120 दिनों में अतिरिक्त कैडर रिव्यू करे; मप्र पुलिस एसोसिएशन ने दायर की थी याचिका

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने सोमवार को एक मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। मप्र पुलिस एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि IPS कैडर रिव्यू में क्यों लेटलतीफी हो रही है। CAT ने आदेश दिए है कि 120 दिनों में अतिरिक्त कैडर रिव्यू किया जाए। सुनवाई के दौरान CAT की तरफ से यह भी टिप्पणी की गई कि कैडर रिव्यू में देर करना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। बता दें, याचिका में लेटलतीफी से IPS अवॉर्ड हुए बिना अधिकारियों के रिटायरमेंट का मुद्दा उठाया गया है। पुलिस एसोसिएशन ने दायर की याचिका
दरअसल, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की जबलपुर पीठ में मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन ने याचिका दायर की थी। जस्टिस अखिल श्रीवास्तव और जस्टिस मल्लिका आर्य की कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया कि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू जैसे अनिवार्य वैधानिक कर्तव्य को समय पर पूरा नहीं किया गया। याचिका में मुद्दा उठाया गया कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत प्रत्येक पांच वर्ष में कैडर रिव्यू किया जाना अनिवार्य है, किंतु पिछले लगभग दो दशकों से यह प्रक्रिया लगातार विलंबित की जाती रही। इस देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा (DSP/ASP) के अनेक पात्र अधिकारी IPS में पदोन्नति/इंडक्शन के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के दौरान यह माना कि कैडर रिव्यू कोई औपचारिक या विवेकाधीन कार्य नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार पर डाला गया अनिवार्य दायित्व है। इस दायित्व के निर्वहन में हुई देरी को न तो प्रशासनिक उदासीनता और न ही निष्क्रियता के आधार पर उचित ठहराया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रकार की देरी से अधिकारियों के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अंतर्गत प्राप्त समानता और पदोन्नति पर विचार के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। कैडर रिव्यू समयबद्ध और अनिवार्य
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने पक्ष रखते हुए यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा Union of India v. Hemraj Singh Chauhan सहित अनेक निर्णयों में स्पष्ट किया है कि कैडर रिव्यू समयबद्ध और अनिवार्य है। अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश के अधिकारी अत्यधिक पिछड़े हुए हैं, जिससे गंभीर असमानता उत्पन्न हुई है। याचिका में यह भी बताया है कि यदि इसी प्रकार देरी जारी रही तो कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाएंगे और IPS में इंडक्शन का अवसर हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। सरकारों की निष्क्रियता, भविष्य से खिलवाड़
ट्रिब्यूनल ने याचिका को गंभीर मानते हुए सरकारों की निष्क्रियता को अधिकारियों के भविष्य से खिलवाड़ करार दिया। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिए है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर रिव्यू किया जाए। यह प्रक्रिया को पूर्ण करने के 120 दिनों का समय दिया गया है। अधिवक्ता पंकज दुबे ने बताया कैट का यह आदेश न केवल राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए राहतकारी है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि वैधानिक दायित्वों की अनदेखी प्रशासन के लिए स्वीकार्य नहीं है।

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