झारखंड की सबसे बड़ी सत्तारूढ़ पार्टी जेएमएम 2025 में बिहार में होने वाले विधानसभा में किस्मत आजमाएगी। बिहार की 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाने को लेकर राजद-कांग्रेस गठबंधन से दावेदारी करेगी। इसके लिए पार्टी बहुत जल्द कांग्रेस और राजद से बातचीत करेगी। बिहार में चुनाव लड़े जाने के पीछे पार्टी का तर्क है कि सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्रों में न केवल जेएमएम का जनाधार है बल्कि पहले भी वहां से विधायक रहे हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो जेएमएम जिन सीटों को लेकर अपनी दावेदारी करेगी उनमें तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज, रूपौली, रामपुर, बनमखनी, जमालपुर, पीरपैंती और चकाई है। 2020 में JMM अकेले लड़ी थी चुनाव ऐसा नहीं है कि जेएमएम पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है। पार्टी इससे पहले भी चुनाव लड़ चुकी है। 2020 में तीन चरण में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अपने उम्मीदवार भी उतारे थे। यह दूसरी बात है कि एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। 2020 के चुनाव में जिन उम्मीदवारों को उतारा था, उनमें चकाई से एलीजाबेथ सोरेन, झाझा से अजीत कुमार, कटोरिया से अंजेला हांसदा, मनीहारी से फूलमणी हेम्ब्रम और धमदाहा से आशोक कुमार हांसदा शामिल हैं। बिहार में जनाधार तो दावा भी होगा चुनाव लड़े जाने की बात को लेकर पार्टी महासचिव विनोद पांडेय का कहना है कि राजद और कांग्रेस से जल्द ही बातचीत की जाएगी। उनका मानना है कि बिहार में हमारी पार्टी का जनाधार भी है और इस लिहाज से पार्टी दावा भी करेगी। विनोद पांडेय के मुताबिक हम जल्द ही गठबंधन से भी बात करेंगे।
उन्हें इस बात की उम्मीद भी है कि महागठबंधन के सहयोगी भी हमारी बातों पर ध्यान देंगे। चुनाव और सीटों को लेकर जनवरी में बात होने की संभावना है। वहीं उनकी पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। झारखंड विधानसभा के सीट बंटवारे से उम्मीद बिहार विधानसभा में जेएमएम की दावेदारी के पीछे झारखंड विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे का भी आधार है। बिहार के पिछले चुनाव में जेएमएम ने राजद पर कई आरोप लगाते हुए अकेले दम पर चुनाव लड़ा था। यह दूसरी बात की कोई जीता नहीं। झारखंड में गठबंधन दल के साथी राष्ट्रीय जनता दल को छह विधानसभा सीटें मिली। इन विधानसभा सीटों में देवघर, गोड्डा, कोडरमा, चतरा, विश्रामपुर व हुसैनाबाद सीट राजद की झोली में थे। ऐसे में जेएमएम को उम्मीद है कि बिहार में भी राजद-कांग्रेस गठबंधन धर्म का पालन करेगी। शिबू सोरेन से लालू की पुरानी दोस्ती राजद और झामुमो के बीच तालमेल कितना होगा यह तो समय तय करेगा। लेकिन, दोनों दलों के अध्यक्ष के बीच पुराना तालमेल हैं। कभी झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की बदौलत लालू प्रसाद बिहार में सत्तारूढ़ हुए थे। लालू प्रसाद और शिबू सोरेन की जोड़ी मशहूर थी। मोर्चा से सहायता मिलने के बाद तात्कालिक मजबूरी के चलते लालू ने झारखंड स्वायत्तशासी पर्षद की मंजूरी दी थी। इससे बिहार से अलग झारखंड गठन का रास्ता साफ हुआ।


