सिरोही के मां अम्बे के.पी. संघवी राजकीय विधि कॉलेज में एलएलएम फाइनल ईयर के विद्यार्थियों ने वर्ष 2024-25 के परीक्षा परिणामों पर गंभीर आपत्ति जताई है। छात्रों का आरोप है कि डिसर्टेशन में उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक दिए गए हैं, जिससे उनमें भारी असंतोष है। विद्यार्थियों ने बताया कि एलएलएम पाठ्यक्रम में डिसर्टेशन एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसके लिए उन्होंने महीनों तक शोध, विषय चयन, डेटा संकलन, केस लॉ अध्ययन और विश्लेषण किया। छात्रों का कहना है कि इतनी मेहनत के बावजूद उन्हें डिसर्टेशन में ऐसे अंक मिले हैं, जो उनके कार्य की गुणवत्ता और पिछले वर्षों के मूल्यांकन मानकों से मेल नहीं खाते। छात्रों ने यह भी बताया कि डिसर्टेशन तैयार करने की प्रक्रिया में उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ा। एडिटिंग, करेक्शन, प्रिंटिंग और बाइंडिंग के लिए कई छात्रों को उदयपुर तक जाना पड़ा, जिसमें प्रति विद्यार्थी लगभग 3,000 से 6,000 रुपए का खर्च आया। इतनी लागत के बावजूद कम अंक मिलने से छात्रों में निराशा है। विद्यार्थियों ने आशंका व्यक्त की है कि इन कम अंकों का उनके शैक्षणिक भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एलएलएम के अंक पीएचडी प्रवेश, NET/JRF जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की पात्रता और मेरिट में महत्वपूर्ण होते हैं। वर्तमान परिणाम कई छात्रों के उच्च शिक्षा और रिसर्च के सपनों को बाधित कर सकते हैं। छात्रों का आरोप है कि डिसर्टेशन जैसे शोध-आधारित कार्य में विषय की गहराई, रिसर्च पद्धति, संदर्भों का उचित उपयोग और मौलिक विश्लेषण के आधार पर अंक दिए जाने चाहिए। हालांकि, वर्तमान परिणामों से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी स्पष्ट दिखती है। पुनर्मूल्यांकन की मांग इन्हीं मांगों को लेकर एलएलएम विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम कॉलेज प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विशेष रूप से डिसेर्टेशन सहित उत्तरपुस्तिकाओं का निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन कराने और मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। शांतिपूर्ण तरीके से रखा पक्ष ज्ञापन सौंपते समय विद्यार्थियों ने शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से अपनी बात रखी। इस दौरान कृष्णपाल सिंह, बंटू सिंह, आकांक्षा ओझा, चेतना सुथार, मुकेश कुमार और प्रद्युम्न आर्य सहित अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे टकराव नहीं, बल्कि न्यायसंगत और निष्पक्ष मूल्यांकन चाहते हैं। विद्यार्थियों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शीघ्र निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगा। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जो आने वाले वर्षों के विद्यार्थियों के लिए अहम होगा।


