नमस्कार बाड़मेर में IAS टीना डाबी को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और कांग्रेस सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने मीटिंग में खरी-खरी सुनाई। विधायक ने तो ‘समोसे’ वाला तंज कर दिया। जयपुर में JDA ने भगवान शिव के मंदिर पर अतिक्रमण का नोटिस चिपका दिया। पाली में रोडवेज बस में कंडक्टर और फ्लाइंग टीम के मेंबर के बीच टिकट मशीन को लेकर छीना झपटी हो गई। डीडवाना कुचामन में दुल्हन बनी शहीद की बेटी ने विदाई से पहले पिता के स्मारक जाकर मूर्ति के पैर छुए। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. भगवान को दे दिया नोटिस यह घटना अगर सतयुग, त्रेता या द्वापर युग में हुई होती को अब तक इंद्र का सिंहासन हिल गया होता। कमल पर बैठे ब्रह्माजी हिलने लगते। क्षीरसागर में लेटे नारायण उठकर बैठ गए होते। यह भी हो सकता है कि शिवजी की तीसरी आंख खुलकर उस नोटिस पर गिरी होती जिसे जयपुर JDA ने शिवजी के मंदिर पर चिपकाया है। क्रोध में भरे भगवान पूछते- मूर्ख अधिकारियों, अतिक्रमण का नोटिस चिपकाया ठीक है। लेकिन नोटिस में व्यक्ति, संस्था या ट्रस्ट का नाम तो लिखते। 7 दिन के अंदर क्या मैं आकर जवाब दूंगा? नोटिस को लेकर भगवान के भक्तों में आक्रोश है। कह रहे हैं कि निगम की जमीन पर मंदिर है। निगम ने ही चारदीवारी बनवाई। अब नोटिस लगा दिया। ये बात ठीक नहीं है। 2. IAS मैडम को सांसद-विधायक ने सुनाई खरी-खरी अधिकारी हैरान-परेशान हैं। इसलिए नहीं कि सांसद और विधायक महोदय ने भरी मीटिंग में अफसरों पर भिन्न-भिन्न आरोप लगाए। बल्कि इसलिए कि विधायक महोदय ने कह दिया कि मीटिंग क्या समोसे खाने के लिए रखी है? अब तक अधिकारी यही मानकर चल रहे थे कि मीटिंग एक्चुअली समोसे खाने के लिए ही होती है। हालांकि मीटिंग से पहले नाश्ते का दौर चला। बाड़मेर को नंबर वन बनाने के दावे किए गए। IAS मैडम की इस बात से सांसद महोदय बहुत खुश और प्रभावित हुए। ‘नंबर वन बना देंगे’ इससे अधिक सकारात्मक ध्येय वाक्य क्या हो सकता है? लेकिन सांसद-विधायक के आक्रोशित होने का कारण ‘अधिकारियों की आत्मनिर्भरता’ थी। वे किसी भी काम के लिए जनप्रतिनिधियों को पूछ ही नहीं रहे। अपने स्तर पर फैसले ले रहे हैं। यहां तक आरोप लगाए गए कि अफसर पैसा लेकर काम कर रहे हैं। नॉन माइनिंग एरिया में जनप्रतिनिधि से बिना पूछे सीधे मंजूरी दे रहे हैं। जब सभी फैसले अधिकारियों को ही लेते हैं तो जनप्रतिनिधियों को मीटिंग में क्यों बुलाया? यह सवाल विधायकजी ने उठाया और ‘समोसे’ वाला तंज कर दिया। 3. रोडवेज बस में मशीन के लिए छीना झपटी ‘खाकर सो जाना चाहिए और मारकर भाग जाना चाहिए।’ गांवों में यह सीख बड़े-बुजुर्ग देते रहे हैं। तात्पर्य यह है कि गुनाह करने के बाद खड़े नहीं रहना चाहिए। पाली में रोडवेज बस के अंदर कंडक्टर ने इसी उक्ति को ध्यान में रखते हुए टिकट काटने वाली मशीन छीन ली। हुआ यूं कि जोधपुर से बस चली। पाली पहुंची तो रास्ते में फ्लाइंग टीम तैनात खड़ी थी। बस को रुकवाया और टीम मेंबर दनदनाते हुए बस में चढ़ गए। खरे आदमी को किसी का डर नहीं लगता। डरता वह है जिसके अंदर खोट हो। कंडक्टर डर गया। टीम मेंबर ने उसके हाथ से टिकट काटने वाली मशीन ले ली। सवारियों और टिकट का हिसाब होने लगा। पहले तो कंडक्टर रिरियाता रहा। मशीन मांगता रहा। बस से उतरकर बात करने की बात कहता रहा। लेकिन जब लगा कि बस अब पंजा गर्दन तक पहुंच ही गया है, तो उसने सारी शक्ति जुटाई और टिकट मशीन पर ‘लूम’ गया। फ्लाइंग वाले ने मशीन वाला हाथ उसकी पहुंच से दूर ले जाने की कोशिश की। लेकिन जैसे भूखा शेर बकरी पर टूट पड़ता है। उसी तरह कंडक्टर झपट पड़ा और मशीन छीनकर ही दम लिया। 4. चलते-चलते बेटियां अपने पिता से इतना लगाव रखती हैं कि इसे बताया-सुनाया नहीं जा सकता। महसूस किया जा सकता है। डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना में अंजू के पिता 2012 में सियाचिन में शहीद हो गए। मासूम बच्ची पर गहरा असर पड़ा। पिता का साया सिर पर नहीं रहा। फिर गांव में उसके पिताजी की मूर्ति लग गई। बिटिया ने मूर्ति में ही पिता के प्राण खोज लिए। वार-त्योहार, सफलता, किसी भी अवसर पर वह पिता का आशीर्वाद लेना नहीं भूलती। बिटिया की शादी हुई तो विदाई का वक्त आया। दूल्हे का हाथ पकड़ दुल्हन पिता के स्मारक पर पहुंच गई। दुल्हन ने पिता के पैर छुए। पीछे पीछे दूल्हा भी शहीद के पैरों पर झुका। गांव में जिसने भी यह दृश्य देखा उसकी आंखें भर आई। यह वीडियो बेटी ने शेयर करते हुए लिखा- ‘भले पास नहीं रहे, लेकिन साये की तरह साथ रहते हैं पापा..’ वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…


