मध्यप्रदेश के लोगों में खून की कमी है। स्थिति यह है कि 5 साल से छोटे हर 10 में से 5 बच्चे और हर 10 में से 3 महिलाएं एनीमिक हैं। इसकी पुष्टि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम 2025-26 के तहत प्रदेश भर में हुई स्क्रीनिंग की रिपोर्ट ने की है। यह स्थिति इशारा करती है कि प्रदेशवासी कम पोषण और खराब खान-पान ले रहे हैं। हालांकि, एक राहत की बात यह है कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में देशभर में मध्यप्रदेश लगातार 6 माह से पहली रैंक हासिल किए हुए हैं। यानी, प्रदेश के हेल्थ वर्कर्स एनीमिक मरीजों की समय रहते पहचान और उन्हें जरूरी इलाज मुहैया करा रहे हैं। सही विकास के लिए एनीमिक मुक्त होना जरूरी
एनीमिया मुक्त होने का अर्थ है कि बच्चों और महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके। यह कार्यक्रम मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में किए गए प्रभावी प्रयासों का रिजल्ट यह रहा कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत सरकार की एचएमआईएस रैंकिंग में मध्य प्रदेश ने लगातार पिछली दो तिमाहियों में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल है। उन्होंने अभियान से जुड़े समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मैदानी अमले की सराहना करते हुए कहा कि इनके अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही इतने व्यापक स्तर पर जांच, उपचार और जागरूकता संभव हो पाई है। एनीमिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहेंगे। MP में 70 लाख बच्चों और 9 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग
वर्तमान फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान प्रदेश में दस्तक अभियान के प्रथम चरण का संचालन 22 जुलाई से 16 सितम्बर 2025 तक किया गया। इस दौरान 6 माह से 59 माह (पांच साल से छोटे) तक के कुल 70.62 लाख बच्चों में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से हीमोग्लोबिन की जांच सुनिश्चित की गई। जांच के बाद लगभग 35.21 लाख एनीमिक बच्चों को जरूरी इलाज मुहैया कराया गया। जबकि, 3,575 गंभीर एनीमिया से ग्रस्त बच्चों को आईडेंटिफाई कर रक्ताधान समेत अन्य जरूरी इलाज की व्यवस्था कर यथोचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। अभियान के दौरान प्रदेश की 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच भी की गई। जांच के दौरान 3.02 लाख मध्यम से गंभीर तथा 10,660 अतिगंभीर एनीमिक महिलाओं को चिन्हांकित किया गया, जिन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड (आईएफए), आयरन सुक्रोश, एफसीएम तथा आवश्यकता अनुसार रक्ताधान के माध्यम से उपचारित किया गया। इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा मिला है। एनीमिया से लड़ने की MP की रणनीति 2018 में हुई थी राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत
भारत सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के अंतर्गत की गई थी। इस अभियान का वर्तमान लक्ष्य मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार लाना, बच्चों और महिलाओं को एनीमिया मुक्त बनाना है। मध्य प्रदेश में किए जा रहे समर्पित प्रयास इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एनीमिया से बचने के लिए क्या करें डेली डाइट में पालक को जरूर शामिल करें पालक में आयरन, फोलेट और विटामिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। शरीर में खून की कमी हो तो डेली डाइट में पालक को जरूर शामिल करें। ज्यादातर महिलाओं में आयरन की कमी पाई जाती है। इसलिए उन्हें पालक खाने की सलाह दी जाती है। अंजीर खाने से बढ़ती है हीमोग्लोबिन अंजीर में आयरन, विटामिन ए, विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जिन लोगों के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी है उन्हें अपनी डाइट में अंजीर को जरूर शामिल करना चाहिए। इसके लिए 1-2 अंजीर को रातभर पानी में भिगोएं और सुबह खाली पेट खाएं। रोज चुकंदर खाने से दूर होती है खून की कमी जिनके शरीर में खून की कमी हो, उन्हें रोजाना चुकंदर का सेवन करना चाहिए। चुकंदर में आयरन, पोटेशियम, फाइबर, फोलिक एसिड की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसे खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी दूर होती है। रोजाना चुकंदर के जूस पीने या सलाद में चुकंदर शामिल करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती। आयरन, कॉपर और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है शकरकंद मीठे आलू के नाम से मशहूर शकरकंद में आयरन, फोलेट, कॉपर, मैग्नीशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसे खाने से शरीर में खून की कमी दूर होती है। शकरकंद को उबालकर चाट बनाएं या सब्जी की तरह खा सकते हैं। खून की कमी और कमजोरी में कारगर है केला केला सेहत से भरपूर खुराक है। शरीर में खून की कमी होने पर केला जरूर खाएं। केला में पोटैशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। रोजाना केला खाने से शरीर में खून की कमी की समस्या नहीं होती, पेट साफ रहता है, ऊर्जा बढ़ती है और त्वचा जवां नजर आती है। सेहत का खजाना लौकी कई लोगों को लौकी का स्वाद पसंद नहीं आता, लेकिन लौकी खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर लौकी में पोटेशियम, फोलेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन सी जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं। उल्टी, दस्त जैसी समस्याएं होने पर लौकी की सब्जी, सूप, जूस का सेवन करें। कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए लौकी का सेवन करें।


